मुंबई, 20 अगस्त। यूनिसेफ इंडिया के राष्ट्रीय एम्बेसडर और अभिनेता आयुष्मान खुराना ने महाराष्ट्र के जालना जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सीजनल माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों से मुलाकात की और बच्चों के सुरक्षित एवं संरक्षित बचपन की जरूरत पर जोर दिया। यूनिसेफ समर्थित कार्यक्रम के तहत खुराना ने बच्चों, किशोरियों और समुदाय के सदस्यों से बातचीत कर यह समझने का प्रयास किया कि परिवार और समुदाय आधारित देखभाल प्रवासी परिवारों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और मनोसामाजिक सहयोग से जोड़ने में किस तरह मदद कर रही है।
सीजनल माइग्रेशन के बीच बच्चों की सुरक्षा पर जोर
आयुष्मान खुराना ने कहा कि मजबूरी में किया जाने वाला सीजनल माइग्रेशन कई परिवारों की कठोर वास्तविकता है, लेकिन किसी भी बच्चे को अपनी परिस्थितियों के कारण अपना बचपन नहीं खोना चाहिए। जालना में उन्होंने देखा कि समुदाय मिलकर माइग्रेशन से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा कर रहा है और उन्हें परिवार, देखभाल तथा सहयोग से जोड़े रख रहा है।
उन्होंने कहा कि किनशिप केयर बच्चों को केवल सुरक्षित घर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों को बनाए रखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और बेहतर भविष्य की उम्मीद पैदा करने में भी मदद करता है।
बालमित्र निभा रहे अहम भूमिका
खुराना ने युवा कम्युनिटी लीडरों और बालमित्रों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बालमित्र बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के साथ-साथ बाल मजदूरी और बाल विवाह जैसे जोखिमों को रोकने में भी मदद करते हैं।
आयुष्मान खुराना ने कहा कि भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून मौजूद हैं, जिनमें किशोर न्याय अधिनियम भी शामिल है, जिसने इस वर्ष दस वर्ष पूरे किए हैं। अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इन सुरक्षा उपायों का लाभ हर बच्चे और परिवार तक पहुंचे, खासकर उन परिवारों तक जो सीजनल माइग्रेशन की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
शिल्पा की कहानी से दिखी शिक्षा की अहमियत
इस दौरान आयुष्मान खुराना ने 18 वर्षीय शिल्पा से भी मुलाकात की। शिल्पा पहले अपने परिवार के साथ प्रवास कर चुकी हैं। अब उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी कर व्यावसायिक पाठ्यक्रम में दाखिला लिया है। खुराना ने कहा कि लड़कियों के सपने तभी पूरे हो सकते हैं, जब बच्चे शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण में बड़े हों।
उन्होंने ऐसे परिवार से भी मुलाकात की, जो अपने दो छोटे पोते-पोतियों की देखभाल कर रहा है, क्योंकि उनके पिता सीजनल काम के लिए प्रवास करते हैं। समुदाय और बालमित्रों के सहयोग से दोनों बच्चे स्कूल में बने हुए हैं और उन्हें पोषण तथा टीकाकरण जैसी आवश्यक सेवाएं भी मिल रही हैं।



