देहरादून, 25 जुलाई। उत्तराखंड सरकार ने पेयजल परियोजनाओं को अधिक किफायती, टिकाऊ और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में पेयजल योजनाओं के सौर ऊर्जा आधारित संचालन, परियोजनाओं की लागत नियंत्रण और परामर्शदाताओं की फीस व्यवस्था में सुधार पर विशेष जोर दिया गया।
पेयजल योजनाओं के सौर ऊर्जा संचालन पर जोर
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पंपिंग आधारित पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को अधिक किफायती और दीर्घकालिक बनाने के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं को प्राथमिकता से शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में बनने वाली सभी पंपिंग पेयजल परियोजनाओं में सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था की व्यवहारिकता का अनिवार्य रूप से परीक्षण किया जाए।
उन्होंने नियोजन विभाग को इस संबंध में आवश्यक शासनादेश जारी करने के निर्देश भी दिए, ताकि सभी विभाग एक समान नीति के तहत कार्य कर सकें।
परियोजनाओं की लागत बढ़ने पर होगी जवाबदेही तय
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने परियोजनाओं की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि के मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी एजेंसी के गलत आकलन के कारण परियोजना की लागत बढ़ती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने नियोजन विभाग को लोक निर्माण विभाग के सहयोग से लागत परिवर्तन संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा। उनका मानना है कि इससे सरकारी परियोजनाओं में अनावश्यक लागत वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
परामर्शदाताओं की फीस व्यवस्था में होगा सुधार
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि कई विभाग अभी भी परामर्शदाताओं को परियोजना लागत के प्रतिशत के आधार पर भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में जारी निर्देशों के अनुसार परामर्शदाताओं को निर्धारित एकमुश्त शुल्क दिया जाना चाहिए।
उन्होंने संबंधित शासनादेश को दोबारा सभी विभागों को भेजने और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आयुष और तकनीकी शिक्षा परियोजनाओं पर भी चर्चा
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में आयुष क्षेत्र की अपार संभावनाओं को देखते हुए उच्च गुणवत्ता वाली परियोजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने परियोजनाओं के लिए उपयुक्त स्थान चयन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
इसके अलावा बागेश्वर जिले के गरुड़ क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के आसपास छात्रावास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि दूरदराज के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिल सके।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


