नई दिल्ली, 11 अगस्त। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को आईसीएआर-आईएआरआई, पूसा में नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के माध्यम से देशभर के कृषि विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप और फेलोशिप राशि जारी की। इस पहल के तहत 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को कुल 21.35 करोड़ रुपये की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दी गई।
इस नई व्यवस्था के बाद कृषि विद्यार्थियों को हर महीने बिना परेशानी के स्कॉलरशिप की राशि DBT के जरिए मिलने की सुविधा होगी। सरकार की इस पहल का उद्देश्य छात्रवृत्ति वितरण को अधिक पारदर्शी, तेज और निर्बाध बनाना है।
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल से समय पर मिलेगी आर्थिक सहायता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्कॉलरशिप केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह कृषि शिक्षा को अधिक सशक्त, व्यावहारिक और अवसरों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि DBT व्यवस्था लागू होने से विद्यार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता मिलेगी और पारंपरिक देरी की समस्या समाप्त होगी।
केंद्रीय मंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कृषि शिक्षा में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल कक्षा आधारित पढ़ाई से अच्छे किसान, वैज्ञानिक या कृषि उद्यमी तैयार नहीं किए जा सकते। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपने सुझाव और सुधार से जुड़े विचार साझा करने की अपील की।
कृषि शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार कृषि क्षेत्र में फूड सिक्योरिटी, न्यूट्रिशन और किसानों की आय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की। उनके अनुसार, वैज्ञानिकों के शोध और किसानों के परिश्रम से देश के अन्न भंडार मजबूत हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से करियर के साथ बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और देश के लिए सार्थक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि विद्यार्थी केवल रोजगार तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाएं।
NSP-DBT प्रणाली से छात्रवृत्ति वितरण होगा पारदर्शी
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि NSP-DBT प्रणाली के जरिए छात्रवृत्ति वितरण अधिक पारदर्शी, तेज और निर्बाध होगा। इससे विद्यार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी और वे अपनी शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि कृषि शिक्षा को तकनीक, प्रशिक्षण और उद्योग-उन्मुखता से जोड़ना जरूरी है। इससे कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली भविष्य की चुनौतियों का बेहतर समाधान खोजने में मदद मिलेगी।
हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण की अपील
हरियाली अमावस्या के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने देशभर के ICAR संस्थानों में कृषि विद्यार्थियों से पौधारोपण करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि हरित पहलें कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा हैं।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, ICAR के सचिव ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, डीडीजी डॉ. यशपाल सिंह मलिक और IARI के निदेशक डॉ. सी. श्रीनिवास राव मौजूद रहे। इसके अलावा ICAR और IARI के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए। हजारों विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े।



