नई दिल्ली, 28 जून। बीते सप्ताह देश के खाद्य तेल और तिलहन बाजार में कीमतों में हल्का सुधार दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों की कीमतों में मजबूती का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया, हालांकि मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण तेजी सीमित रही। इसके बावजूद सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, कच्चा पाम तेल, पाम तेल तथा बिनौला तेल के दाम सप्ताह के अंत में मजबूती के साथ बंद हुए।
बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी बनी हुई है, लेकिन देश के हाजिर बाजार में खरीदारी की रफ्तार धीमी होने के कारण घरेलू बाजार में उसी अनुपात में तेजी नहीं आ सकी। इसका परिणाम यह रहा कि अधिकांश तेल और तिलहनों की कीमतों में केवल सीमित सुधार देखने को मिला।
सरसों की ऊंची कीमतों से मांग पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके कारण उपभोक्ता मांग अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। दूसरी ओर कारोबारी सरसों का भाव ऊंचा रखकर बिक्री कर रहे हैं, जिससे सरसों दाना और सरसों तेल दोनों की कीमतों में मजबूती बनी हुई है।
कारोबारियों का कहना है कि वर्तमान समय में बाजार में उपलब्ध सरसों की मात्रा सीमित है और किसान भी जल्दबाजी में अपनी उपज बेचने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में कीमतों पर दबाव बनने के बजाय मजबूती का वातावरण बना हुआ है।
सोयाबीन उत्पादकों को मिला बेहतर मूल्य
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कई वर्षों बाद पहली बार सोयाबीन उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक भाव मिल रहे हैं। इससे किसानों का विश्वास बढ़ा है और वे कम कीमत पर अपनी उपज बेचने के लिए तैयार नहीं हैं।
जानकारों का मानना है कि पहले प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा खरीद मूल्य में उतार-चढ़ाव कर बाजार को प्रभावित किया जाता था, लेकिन इस बार किसान बेहतर कीमत मिलने तक अपनी उपज रोककर रखने की रणनीति अपना रहे हैं। इसी कारण सप्ताह के दौरान सोयाबीन तिलहन और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में भी मजबूती दर्ज की गई।
विदेशी बाजारों की तेजी का दिखा असर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों की कीमतें मजबूत रहने से सोयाबीन तेल के दाम में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि बाजार विशेषज्ञों ने यह भी चिंता जताई कि कई आयातक अभी भी आयात लागत से कम मूल्य पर सोयाबीन और पाम तेल की बिक्री कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इससे वित्तीय संस्थानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, विदेशी मुद्रा की भी हानि होती है और घरेलू तेल बाजार की कारोबारी धारणा प्रभावित होती है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
मूंगफली तेल की मांग में आई तेजी
विशेषज्ञों के अनुसार मूंगफली तेल का थोक मूल्य अभी भी काफी आकर्षक बना हुआ है। इसकी कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे है और यह सूरजमुखी तेल की तुलना में लगभग दस रुपये प्रति किलोग्राम सस्ता पड़ रहा है।
कम कीमत के कारण बाजार में मूंगफली तेल की मांग बढ़ी है, जिसका असर सप्ताह के दौरान इसकी कीमतों में सुधार के रूप में देखने को मिला। कारोबारियों का कहना है कि यदि यह मांग आगे भी बनी रहती है तो आने वाले समय में कीमतों में और मजबूती आ सकती है।
बिनौला तेल की सीमित उपलब्धता से बढ़े दाम
बाजार सूत्रों के अनुसार इस समय बिनौला की उपलब्धता सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम है। जहां इस मौसम में लाखों गांठ की आपूर्ति होती थी, वहीं इस बार यह घटकर कुछ हजार गांठ तक सीमित रह गई है।
आपूर्ति कम होने और मांग बनी रहने से बिनौला तेल की कीमतों में भी मजबूती दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कमी की भरपाई मुख्य रूप से पाम तेल ही कर सकता है। यही कारण है कि पाम तेल और पामोलीन की मांग भी लगातार मजबूत बनी हुई है।
बेहतर मूल्य से बढ़ेगा उत्पादन का उत्साह
बाजार जानकारों का मानना है कि सरसों और सोयाबीन उत्पादकों को इस वर्ष मिले बेहतर दाम भविष्य में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे। यदि किसानों को लाभकारी मूल्य मिलता रहा तो तिलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से खाद्य तेलों की उपलब्धता मजबूत होगी, आयात की आवश्यकता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। इसके साथ ही तेल प्रसंस्करण उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
उनके अनुसार यदि यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले वर्षों में देश की आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है, जिससे खाद्य तेल क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।
सप्ताह के दौरान प्रमुख कीमतों में सुधार
बीते सप्ताह सरसों दाना 50 रुपये मजबूत होकर 7,575 से 7,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों तेल में 150 रुपये का सुधार दर्ज किया गया और इसका भाव 15,575 रुपये प्रति क्विंटल रहा। सरसों की पक्की तथा कच्ची घानी तेल की कीमतों में भी 25-25 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सोयाबीन दाना 100 रुपये मजबूत होकर 7,100 से 7,150 रुपये प्रति क्विंटल तथा सोयाबीन लूज 6,950 से 7,025 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सोयाबीन तेल, इंदौर सोयाबीन तेल तथा सोयाबीन डीगम तेल की कीमतों में भी 25 से 50 रुपये तक का सुधार दर्ज किया गया।
मूंगफली तिलहन 50 रुपये की बढ़त के साथ 6,675 से 7,250 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। मूंगफली तेल और परिष्कृत मूंगफली तेल में भी क्रमशः 25 रुपये और पांच रुपये की तेजी रही।
इसी प्रकार कच्चा पाम तेल 25 रुपये मजबूत होकर 13,625 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। पामोलीन तेल में 25 से 50 रुपये तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि बिनौला तेल भी 50 रुपये की बढ़त के साथ 15,650 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
आगे भी बाजार पर रहेगी वैश्विक संकेतों की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में खाद्य तेल बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों, घरेलू मांग और किसानों की बिक्री रणनीति पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक बाजारों में मजबूती बनी रहती है और घरेलू उत्पादन को समर्थन मिलता है तो खाद्य तेल और तिलहन बाजार में स्थिरता के साथ सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।
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