नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारतीय सेना के नए थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने देश की सैन्य शक्ति को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के लिए व्यापक रणनीतिक दृष्टि प्रस्तुत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना को तकनीक-सक्षम, आधुनिक, आत्मनिर्भर और बहुआयामी युद्ध अभियानों के लिए पूरी तरह तैयार बल के रूप में विकसित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए उन्होंने अपनी रणनीतिक कार्ययोजना को ‘विजय’ नाम दिया है, जो आने वाले वर्षों में सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार की दिशा तय करेगी।
रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में आयोजित औपचारिक समारोह में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्राप्त करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री द्वारा उन पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए आभार जताया। उन्होंने राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय सेना अपने गौरवशाली इतिहास, अनुशासन और पेशेवर क्षमता के साथ भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप नई रणनीति
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक सीमाई चुनौतियों के साथ अब साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत तकनीकों से जुड़े नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय सेना को केवल आधुनिक हथियारों से लैस करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी रणनीति, प्रशिक्षण, संरचना और संचालन प्रणाली को भी भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पहले से ही एक अनुभवी और युद्ध के लिए सदैव तैयार सैन्य बल है, लेकिन बदलती परिस्थितियों में निरंतर सुधार और आधुनिकीकरण ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति बनेगा।
‘विजय’ रणनीति का पहला स्तंभ: सतर्कता और युद्धक तैयारी
नए थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि ‘विजय’ रणनीति का पहला और सबसे महत्वपूर्ण आधार सतर्कता तथा युद्धक तत्परता है। इसके अंतर्गत सीमाओं की प्रभावी सुरक्षा, उभरते खतरों की लगातार निगरानी, खुफिया तंत्र को और मजबूत बनाना तथा किसी भी परिस्थिति में त्वरित और निर्णायक सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहना शामिल है।
उन्होंने कहा कि सेना का उद्देश्य हर समय उच्च स्तर की परिचालन क्षमता बनाए रखना है, ताकि किसी भी सुरक्षा चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

नवाचार और आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर
जनरल सेठ ने कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगे। इसलिए सेना में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की आवश्यकता है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, स्वायत्त सैन्य प्रणालियों, साइबर क्षमताओं, उन्नत संचार तकनीकों और डिजिटल युद्ध प्रणाली को भविष्य की सैन्य शक्ति का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि केवल हथियारों का आधुनिकीकरण ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सैन्य सिद्धांतों, रणनीतियों और संचालन पद्धतियों में भी व्यापक बदलाव किए जाएंगे, ताकि भारतीय सेना हर प्रकार के आधुनिक युद्ध परिदृश्य के लिए तैयार रह सके।
संयुक्त सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता होगी प्राथमिकता
नए थल सेनाध्यक्ष ने तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और बेहतर समन्वय को भी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच अधिक प्रभावी तालमेल और संसाधनों का समन्वित उपयोग निर्णायक भूमिका निभाएगा। संयुक्त अभियानों की क्षमता बढ़ाने के लिए सभी स्तरों पर समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।
आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए जनरल सेठ ने कहा कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना, घरेलू रक्षा उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाना और भारतीय तकनीकों के अधिकतम उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे सेना की आवश्यकताओं की पूर्ति देश के भीतर ही संभव होगी और राष्ट्रीय रक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़ बनेगी।
सैनिक ही सेना की सबसे बड़ी शक्ति
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि आधुनिक हथियार और तकनीक जितने महत्वपूर्ण हैं, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण सेना का मानव संसाधन है। उन्होंने सैनिकों के कल्याण, बेहतर प्रशिक्षण, पेशेवर विकास और उच्च मनोबल को सेना की वास्तविक शक्ति बताया।
उन्होंने कहा कि एक अग्निवीर से लेकर सबसे वरिष्ठ पूर्व सैनिक तक प्रत्येक सैनिक भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधि है। सभी योद्धा राष्ट्र की सुरक्षा के समान रूप से महत्वपूर्ण आधार हैं और सेना की सबसे बड़ी ताकत भी।
अपने संबोधन के अंत में जनरल सेठ ने ‘कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि’ के मूल मंत्र के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करती रहेगी और देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में पूरी क्षमता और दृढ़ संकल्प के साथ तैयार रहेगी।


