नई दिल्ली, 1 जुलाई। भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ ने औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में आयोजित ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ समारोह के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल के. एम. सेठ (सेवानिवृत्त) को सैन्य सलाम किया। पिता ने भी पूरे सम्मान के साथ सलाम का प्रत्युत्तर दिया। इसके बाद जनरल सेठ ने अपने पिता सहित परिवार के वरिष्ठ सदस्यों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
यह भावनात्मक क्षण समारोह में उपस्थित सैन्य अधिकारियों, जवानों और अतिथियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। इस अवसर पर उनके छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी मौजूद रहे। उन्होंने भी अपने बड़े भाई और नए थलसेना प्रमुख को सैन्य सलाम कर सम्मान व्यक्त किया। भारतीय सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं में सेवा दे चुके और दे रहे इस परिवार की उपस्थिति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ संभाली नई जिम्मेदारी
थलसेना प्रमुख का पदभार ग्रहण करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने कहा कि भारतीय सेना का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व के साथ-साथ विनम्रता का विषय है। उन्होंने ‘कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि’ के मूल मंत्र के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दोहराते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सेना हर परिस्थिति में पूरी क्षमता और समर्पण के साथ कार्य करती रहेगी।
उन्होंने राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस, समर्पण और निस्वार्थ सेवा सदैव देशवासियों और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
चार दशक का समृद्ध सैन्य अनुभव
जनरल धीरज सेठ इससे पहले भारतीय सेना के उपप्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने 30 जून 2026 को थलसेना प्रमुख का कार्यभार संभाला। इससे पहले निवर्तमान थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त हुए थे।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र जनरल सेठ ने दिसंबर 1986 में भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग चार दशक लंबे सैन्य जीवन में उन्होंने परिचालन, रणनीतिक योजना, क्षमता विकास और संस्थागत सुधार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापक अनुभव अर्जित किया है। सेना की युद्धक क्षमता को सुदृढ़ करने और आधुनिक सैन्य ढांचे के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
महत्वपूर्ण सैन्य जिम्मेदारियों का सफल नेतृत्व
जनरल धीरज सेठ ने अपने सैन्य करियर के दौरान अनेक अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट की कमान संभाली, पश्चिमी मोर्चे पर बख्तरबंद ब्रिगेड का नेतृत्व किया और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का संचालन किया।
लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन ‘सुदर्शन चक्र कोर’ का नेतृत्व किया। इसके अलावा दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों तथा औपचारिक सैन्य दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
पूर्व सैन्य नेतृत्व को दिया सम्मान
अपने संबोधन में जनरल धीरज सेठ ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की वर्तमान मजबूती पूर्व सैन्य नेतृत्व की दूरदृष्टि, अनुशासन और उत्कृष्ट परंपराओं का परिणाम है।
उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने को पूरी तरह तैयार है। नए थलसेना प्रमुख के रूप में उनके नेतृत्व में सेना आधुनिकीकरण, परिचालन क्षमता और संयुक्त सैन्य समन्वय को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


