नई दिल्ली, 28 जून: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय बदलाव देखा है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाते हुए देश में ऑनलाइन लेनदेन का नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं प्रधानमंत्री जन धन योजना, आधार और मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाने की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है।
शनिवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, दस वर्ष पहले एक साधारण डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुआ UPI आज भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां UPI के जरिए केवल दो करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक पहुंच गया। यह वृद्धि भारत में डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाए जाने और तकनीकी बुनियादी ढांचे के मजबूत होने का प्रमाण है।
JAM ट्रिनिटी ने बढ़ाया वित्तीय समावेशन
सरकार की जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) पहल ने देश में वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है। इस मॉडल ने करोड़ों लोगों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया। इससे सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता बढ़ी और लाभ वितरण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी।
जन धन योजना से बैंकिंग सेवाओं का हुआ विस्तार
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत बैंक खातों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। मार्च 2015 में देश में 14.72 करोड़ जन धन खाते थे, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर 57.78 करोड़ हो गए। इसी अवधि में इन खातों में जमा राशि 15,670 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश के दूरदराज और वंचित वर्गों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ी है।
आधार ने बनाई मजबूत डिजिटल पहचान
फैक्टशीट के अनुसार, आधार ने देश में सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल पहचान प्रणाली स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2010-11 में जहां आधार नामांकन केवल 42 लाख था, वहीं मार्च 2026 तक यह संख्या 144 करोड़ से अधिक हो गई। आधार आधारित डिजिटल प्रमाणीकरण ने बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और अन्य डिजिटल सेवाओं को अधिक सुरक्षित और सरल बनाया है।
मोबाइल और इंटरनेट ने डिजिटल सेवाओं को दी रफ्तार
मोबाइल कनेक्टिविटी ने JAM ट्रिनिटी को और मजबूत बनाया है। मार्च 2026 तक भारत के 85.5 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन उपलब्ध था, जबकि देश में 109 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता दर्ज किए गए। स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच ने डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और अन्य डिजिटल सेवाओं के उपयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया है।
DBT से बढ़ी पारदर्शिता, सीधे खातों में पहुंचा लाभ
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली ने सरकारी सहायता वितरण में बड़ा बदलाव किया है। जून 2026 तक DBT के माध्यम से 176 करोड़ लाभार्थियों के बैंक खातों में 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचा, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी काफी हद तक समाप्त हुई और पारदर्शिता में वृद्धि हुई।
डिजिलॉकर ने दस्तावेजों को बनाया पूरी तरह डिजिटल
डिजिलॉकर ने कागजी दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करते हुए सुरक्षित डिजिटल दस्तावेजों की सुविधा उपलब्ध कराई है। मार्च 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर 70.69 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा 850 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं, जिससे दस्तावेजों का सत्यापन पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और कागजरहित हो गया है।
GeM से MSMEs को मिला बड़ा सरकारी बाजार
सरकारी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाने में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने अहम भूमिका निभाई है। जून 2026 तक GeM पर कुल 18.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सकल व्यापार मूल्य (GMV) दर्ज किया गया। इनमें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पांच लाख करोड़ रुपये का कारोबार शामिल है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 11 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सरकारी खरीद प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिला है, जिससे छोटे कारोबारों को भी बड़ा बाजार उपलब्ध हुआ।
डिजिटल इंडिया की मजबूत होती नींव
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, UPI, जन धन योजना, आधार, मोबाइल कनेक्टिविटी, DBT, डिजिलॉकर और GeM जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलकर भारत के समावेशी डिजिटल शासन मॉडल की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं। इन पहलों ने न केवल डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया है, बल्कि देश में वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


