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वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट नहीं देने वाले 76 आवासीय परियोजना प्रवर्तकों पर सख्त हुआ उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण

लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर, 28 जून। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण ने वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत नहीं करने वाले आवासीय परियोजना प्रवर्तकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने ऐसे 76 परियोजनाओं की पहचान की है, जिनके प्रवर्तकों ने अब तक अपनी वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट प्राधिकरण के आधिकारिक जालस्थल पर अपलोड नहीं की है।

प्राधिकरण की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सभी संबंधित प्रवर्तकों को कारण बताओ सूचना जारी कर 15 दिन के भीतर निर्धारित विलंब शुल्क के साथ अनिवार्य रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय में अनुपालन नहीं होने पर परियोजना की अनुमानित लागत के पांच प्रतिशत तक आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।

समय पर लेखा परीक्षण रिपोर्ट देना है कानूनी दायित्व

भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण के नियमों के अनुसार प्रत्येक आवासीय परियोजना के प्रवर्तक के लिए यह अनिवार्य है कि वह प्रत्येक वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद परियोजना के खातों का स्वतंत्र लेखा परीक्षण कराए और छह माह के भीतर उसकी रिपोर्ट प्राधिकरण के जालस्थल पर उपलब्ध कराए।

इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं की वित्तीय स्थिति की नियमित समीक्षा करना, धन के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा घर खरीदारों और अन्य संबंधित पक्षों को सही एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

प्राधिकरण का कहना है कि समय पर रिपोर्ट उपलब्ध होने से परियोजना की प्रगति और वित्तीय अनुशासन का निष्पक्ष मूल्यांकन संभव हो पाता है।

स्वतंत्र लेखा परीक्षण की व्यवस्था अनिवार्य

नियमों के अनुसार परियोजना के खातों का परीक्षण ऐसे बाहरी लेखा परीक्षक से कराया जाना आवश्यक है, जिसका प्रवर्तक या उससे जुड़े किसी समूह अथवा संस्था से प्रत्यक्ष संबंध न हो।

प्राधिकरण का मानना है कि स्वतंत्र लेखा परीक्षण से परियोजना की वित्तीय जानकारी की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित होती है और रिपोर्ट की विश्वसनीयता बनी रहती है। इससे निवेशकों और घर खरीदारों का विश्वास भी मजबूत होता है।

रिपोर्ट नहीं देने पर लगेगा विलंब शुल्क और भारी दंड

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं करने वाले प्रत्येक प्रवर्तक को संबंधित वित्त वर्ष के लिए 25 हजार रुपये का विलंब शुल्क देना होगा।

इसके अतिरिक्त यदि यह पाया जाता है कि प्रवर्तक ने नियमों और अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है तो परियोजना की अनुमानित लागत के पांच प्रतिशत तक आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। यह प्रावधान परियोजनाओं में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने और नियमों के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उद्देश्य

प्राधिकरण ने कहा है कि वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट अपलोड नहीं करना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। यह व्यवस्था केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा और परियोजनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में परियोजना की वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन कठिन हो जाता है, जिससे खरीदारों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

15 दिन का अंतिम अवसर

प्राधिकरण ने सभी उल्लंघनकर्ता प्रवर्तकों को अंतिम अवसर देते हुए 15 दिनों के भीतर विलंब शुल्क के साथ आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं किया जाता है तो नियमानुसार आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन के मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और सभी परियोजनाओं में समान रूप से नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

घर खरीदारों का विश्वास बनाए रखना प्राथमिकता

उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट समय पर जमा करना प्रत्येक प्रवर्तक की मूल जिम्मेदारी है। स्वतंत्र लेखा परीक्षण और सही वित्तीय विवरण से परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ती है तथा घर खरीदारों का विश्वास मजबूत होता है।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण भविष्य में भी नियमों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करेगा, ताकि आवंटियों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहें और प्रदेश का आवासीय क्षेत्र अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय व्यवस्था के साथ आगे बढ़ सके।

नियमों के पालन पर रहेगा विशेष जोर

प्राधिकरण का मानना है कि वित्तीय अनुशासन, समय पर लेखा परीक्षण और पारदर्शी व्यवस्था ही किसी भी आवासीय परियोजना की विश्वसनीयता का आधार है। इसी उद्देश्य से वार्षिक लेखा परीक्षण रिपोर्ट को अनिवार्य बनाया गया है। प्राधिकरण ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों की नियमित निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रवर्तकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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