वाशिंगटन, 30 जून। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच लगभग डेढ़ वर्ष से चल रही बातचीत निर्णायक दौर में है और अब केवल कुछ अंतिम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बहुप्रतीक्षित समझौता शीघ्र पूरा हो जाएगा और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत की गति काफी तेज हुई है। उनका कहना था कि समझौते का अधिकांश हिस्सा तय हो चुका है और अब केवल अंतिम एक-दो प्रतिशत बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है।
अंतिम दौर में पहुंची वार्ता
सर्जियो गोर ने बताया कि हाल ही में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर दो दिन के दौरे पर नई दिल्ली आए थे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच लंबी और महत्वपूर्ण बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि समझौता अब अंतिम चरण में है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के वार्ताकार शेष बचे मुद्दों का समाधान निकालने के लिए लगातार संपर्क में हैं और यह प्रयास किया जा रहा है कि समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जाए। उनके अनुसार, अब चर्चा केवल उन सीमित विषयों पर केंद्रित है जिन पर अंतिम सहमति आवश्यक है।
बड़े व्यापार समझौतों में समय लगना स्वाभाविक
व्यापार समझौते में हुई देरी पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए गोर ने कहा कि इतने बड़े और व्यापक समझौते को तैयार करने में समय लगना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका जैसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापारिक हितों का संतुलन स्थापित करना आसान नहीं होता।
उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को पूरा होने में वर्षों लग जाते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों के साथ हुए कुछ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने में दो दशक तक का समय लगा। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच लगभग 18 महीने में समझौते का अंतिम चरण तक पहुंच जाना सकारात्मक संकेत है।
दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा समझौता
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता किसी एक देश के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होगा। उनके अनुसार, यह ऐसा समझौता होगा जिसमें दोनों पक्षों को नए अवसर मिलेंगे और आर्थिक सहयोग पहले से अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि इस करार से व्यापारिक गतिविधियों को स्थिरता मिलेगी और दोनों देशों की कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश और कारोबार की स्पष्ट दिशा प्राप्त होगी। इससे उद्योग जगत का भरोसा भी बढ़ेगा और नई आर्थिक संभावनाएं खुलेंगी।
कारोबार जगत को मिलेगी अधिक स्थिरता
गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। उनका कहना था कि स्पष्ट नियम और पारदर्शी व्यवस्था बनने से व्यापारिक अनिश्चितता कम होगी तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के कारोबारी लंबे समय से ऐसे समझौते की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके और बाजार तक पहुंच अधिक आसान बनाई जा सके।
हाल के सप्ताहों में तेज हुई बातचीत
अमेरिकी राजदूत ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच लगातार उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल हाल ही में अमेरिका के दौरे पर थे। इसके तुरंत बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर नई दिल्ली पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इस लगातार संवाद से स्पष्ट है कि दोनों सरकारें समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए पूरी गंभीरता के साथ प्रयास कर रही हैं।
दो दशकों में कई गुना बढ़ा द्विपक्षीय व्यापार
सर्जियो गोर ने कहा कि पिछले बीस वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि दोनों देशों की मजबूत आर्थिक साझेदारी का प्रमाण है और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी आने की पूरी संभावना है।
500 अरब डॉलर के लक्ष्य पर दोनों देशों की नजर
गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय किए गए 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रस्तावित व्यापार समझौता समय पर लागू हो जाता है तो इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बड़ी प्रगति होगी। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच निवेश, विनिर्माण, सेवाओं और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात लगातार मजबूत हुआ है और भविष्य में इसमें और विस्तार की संभावना है।
द्विपक्षीय संबंधों पर उठ रहे सवालों को किया खारिज
भारत और अमेरिका के संबंधों में कथित तनाव की चर्चाओं को खारिज करते हुए गोर ने कहा कि वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि व्यापार, रक्षा, निवेश, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
उनका कहना था कि सार्वजनिक चर्चाओं या सामाजिक माध्यमों पर व्यक्त की जाने वाली राय से अलग, दोनों सरकारें आपसी सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं।
व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी
गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, अर्धचालक उद्योग, महत्वपूर्ण खनिज, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और निवेश जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों सरकारें इस संबंध को इक्कीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक मानती हैं और भविष्य में इसे और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पहले चरण के समझौते पर जारी है बातचीत
भारत और अमेरिका वर्तमान में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर बातचीत कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य बाजार तक पहुंच बढ़ाना, व्यापारिक बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहन देना और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता शीघ्र अंतिम रूप लेता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई ऊर्जा आएगी। साथ ही वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी पहले से अधिक मजबूत होकर उभरेगी।


