नई दिल्ली, 28 जून। भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्री सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अत्याधुनिक तेज गश्ती पोत ‘अक्षय’ को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। गोवा स्थित जहाज निर्माण केंद्र में आयोजित एक समारोह के दौरान इस नई पीढ़ी के गश्ती पोत को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया गया।
समारोह में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की अतिरिक्त सचिव श्रीमती परमा सेन ने पोत का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर भारतीय तटरक्षक बल के पश्चिमी क्षेत्र के कमांडर महानिरीक्षक भीष्म शर्मा, उप महानिदेशक (मानव संसाधन विकास) महानिरीक्षक ज्योतिंद्र सिंह सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा जहाज निर्माण संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
‘अक्षय’ नाम में निहित है अटूट संकल्प
‘अक्षय’ का अर्थ है अविनाशी। यह नाम भारतीय तटरक्षक बल की अडिग प्रतिबद्धता, साहस और देश के समुद्री हितों की रक्षा के दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना गया है। इस गश्ती पोत के शामिल होने से समुद्री सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ गश्ती पोत
यह गश्ती पोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है। इसका निर्माण गोवा स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के जहाज निर्माण प्रतिष्ठान ने किया है। यह देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ती स्वदेशी क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
इस पोत का निर्माण भारतीय जहाज निर्माण उद्योग की तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता को भी दर्शाता है। इससे देश के रक्षा और समुद्री क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएगा पोत
‘अक्षय’ समुद्री कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने, खोज एवं बचाव अभियान चलाने, तटीय सुरक्षा को मजबूत करने, समुद्री पर्यावरण संरक्षण तथा संकट में फंसे नाविकों की सहायता जैसी अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा। इसके अलावा समुद्री क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने में भी यह पोत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आधुनिकीकरण अभियान को मिलेगा बल
कमांडेंट (कनिष्ठ श्रेणी) दीपक चौबे के नेतृत्व में यह गश्ती पोत अब भारतीय तटरक्षक बल के सक्रिय बेड़े का हिस्सा बन गया है। अधिकारियों का मानना है कि इसके शामिल होने से तटरक्षक बल के आधुनिकीकरण अभियान को नई गति मिलेगी। साथ ही भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, तटीय निगरानी और समुद्री हितों की रक्षा की क्षमता पहले की तुलना में और अधिक प्रभावी तथा सशक्त होगी।


