अहमदाबाद, 28 जून। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को सहकारिता आधारित परिवहन मंच ‘भारत टैक्सी’ का शुभारंभ करते हुए कहा कि सहकारिता ने देश के अनेक क्षेत्रों में शोषण की व्यवस्था समाप्त कर लोगों को अधिकार, सम्मान और आर्थिक समृद्धि प्रदान की है। उन्होंने कहा कि अब यही सफल मॉडल परिवहन क्षेत्र में भी लागू किया जा रहा है, जिससे वाहन संचालकों और यात्रियों दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा।
गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक विकास के साथ परिवहन सेवाओं की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। अब परिवहन केवल चार पहिया वाहनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोपहिया वाहन, तीन पहिया वाहन और अन्य शहरी यातायात सेवाएं भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे समय में सहकारिता आधारित परिवहन व्यवस्था की शुरुआत एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है।
चालक नहीं, ‘सारथी’ होंगे व्यवस्था के भागीदार
अमित शाह ने कहा कि इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कार्य संस्कृति है। उन्होंने कहा कि जहां निजी परिवहन मंच वाहन चलाने वालों को केवल चालक के रूप में देखते हैं, वहीं भारत टैक्सी उन्हें ‘सारथी’ मानती है।
उन्होंने कहा कि यह केवल संबोधन का बदलाव नहीं, बल्कि पूरी सोच का परिवर्तन है। सारथी इस व्यवस्था में केवल सेवा देने वाले व्यक्ति नहीं होंगे, बल्कि सहकारी संस्था के सम्मानित सदस्य और उसके वास्तविक भागीदार भी होंगे। इस मॉडल का उद्देश्य सारथियों और यात्रियों दोनों के हितों की रक्षा करना तथा परिवहन सेवाओं को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और न्यायपूर्ण बनाना है।
निजी मंचों की कमियों का विकल्प बनेगा नया मॉडल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निजी माध्यमों से संचालित परिवहन सेवाओं को लेकर अनेक शिकायतें सामने आई हैं। कई मामलों में वाहन चालकों से अत्यधिक कमीशन लिया गया, समय पर भुगतान नहीं किया गया और बिना समुचित प्रक्रिया के उनके पंजीकरण बंद कर दिए गए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक समस्या का समाधान केवल कानून बनाकर नहीं किया जा सकता। कई बार ऐसी समस्याओं का स्थायी समाधान एक बेहतर संस्थागत व्यवस्था से निकलता है। इसी सोच के आधार पर सहकारिता आधारित भारत टैक्सी की परिकल्पना की गई है, जिसमें लाभ से अधिक महत्व भागीदारी, पारदर्शिता और विश्वास को दिया गया है।
सहकारिता ने बदली लाखों लोगों की जिंदगी
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन ने देश के अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने दुग्ध क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय मात्र 100 रुपये के अंशदान से सहकारी व्यवस्था से जुड़ने वाली ग्रामीण पशुपालक महिलाएं आज देश के सबसे बड़े और विश्वसनीय दुग्ध कारोबार की भागीदार हैं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त की, पारदर्शिता बढ़ाई और मेहनतकश लोगों की आय सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचाई। भारत टैक्सी भी इसी सफल सहकारी मॉडल को परिवहन क्षेत्र में लागू करने का प्रयास है, जिससे वाहन संचालकों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सके।
देश की प्रमुख सहकारी संस्थाएं आईं साथ
उन्होंने बताया कि जब इस नई पहल की रूपरेखा तैयार की गई तो सबसे बड़ा प्रश्न संसाधनों की व्यवस्था का था। इसके लिए देश की प्रमुख सहकारी संस्थाओं से विचार-विमर्श किया गया और उन्हें इस अभियान से जुड़ने का आग्रह किया गया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय किसान उर्वरक सहकारी संस्था, कृषक भारती सहकारी संस्था, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात संस्था तथा अमूल जैसी प्रमुख संस्थाओं ने इस पहल में सहयोग देने का निर्णय लिया है।
इन संस्थाओं के सहयोग से परिवहन क्षेत्र में एक ऐसा सहकारी विकल्प तैयार किया जा रहा है, जो निजी कंपनियों के मुकाबले अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सारथी हितैषी व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।
सात लाख से अधिक सारथी जुड़े
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने बताया कि भारत टैक्सी से अब तक सात लाख से अधिक सारथी जुड़ चुके हैं, जबकि 37 लाख से अधिक ग्राहक इसकी सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इतनी कम अवधि में बड़ी संख्या में लोगों का इस व्यवस्था से जुड़ना इसके प्रति बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि यह मंच केवल यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में इससे जुड़े सारथियों को ऋण सुविधा, बीमा सुरक्षा और व्यवसाय विस्तार के लिए भी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
सारथियों के हित होंगे सर्वोच्च प्राथमिकता
अमित शाह ने सारथियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत टैक्सी उनकी अपनी संस्था है, जिसका उद्देश्य उनका शोषण रोकना, उन्हें सम्मान देना और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है, जबकि सहकारिता आधारित व्यवस्था का उद्देश्य अपने सदस्यों का कल्याण करना है। इसलिए इस मंच पर अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक सुरक्षा, सम्मानजनक आय और स्थायी आजीविका को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यही संस्था सारथियों को आर्थिक सहायता, बीमा संरक्षण तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ने का माध्यम बनेगी।
परिवहन क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सात लाख से अधिक सारथियों का एक साझा परिवार बनना सहकारिता आंदोलन के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह सहकारी परिवहन व्यवस्था देश के परिवहन क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि सहकारिता का यह मॉडल इसी प्रकार आगे बढ़ता रहा तो परिवहन क्षेत्र में पारदर्शिता, विश्वास, सेवा की गुणवत्ता और सारथियों की आर्थिक सुरक्षा के नए मानक स्थापित होंगे। इससे न केवल लाखों वाहन संचालकों को लाभ मिलेगा, बल्कि यात्रियों को भी अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और जवाबदेह परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।

