हरिद्वार, 25 जून। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला। सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा तटों पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। विशेष रूप से हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां भक्तों ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर भगवान विष्णु का स्मरण किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
अलसुबह से शुरू हुआ स्नान का सिलसिला
निर्जला एकादशी के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का गंगा घाटों पर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और प्रमुख घाटों पर स्नान का क्रम देर शाम तक जारी रहा।
हरिद्वार के विभिन्न घाटों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। स्नान के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने जलदान, अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा कर धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध
श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की थी। पूरे मेला क्षेत्र को चार सुपर जोन, 12 जोन और 30 सेक्टरों में विभाजित कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया गया।
संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। साथ ही भीड़ नियंत्रण और यातायात संचालन के लिए विशेष निगरानी रखी गई। प्रशासन ने प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन योजना भी लागू की तथा दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई।
धार्मिक महत्व के कारण विशेष है निर्जला एकादशी
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, जलदान और अन्नदान का विशेष महत्व होता है।
विद्वानों का मानना है कि जो श्रद्धालु वर्षभर सभी एकादशी व्रत नहीं कर पाते, उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने मंदिरों और ब्राह्मणों को घड़े, सुराही, फल, पंखे और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान भी किया।
आश्रमों और अखाड़ों में हुए धार्मिक आयोजन
तीर्थनगरी के विभिन्न आश्रमों, अखाड़ों और धार्मिक संस्थानों में भी निर्जला एकादशी के अवसर पर विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने निर्जल व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना की और परिवार की मंगलकामना की।
सोमवती अमावस्या के बाद फिर जुटी बड़ी संख्या
गौरतलब है कि हाल ही में सोमवती अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार में 76 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने निर्जला एकादशी पर भी सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए थे।
प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना था, ताकि वे बिना किसी परेशानी के धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकें। निर्जला एकादशी पर हरिद्वार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर धर्मनगरी की आध्यात्मिक महत्ता और सनातन आस्था की गहराई को प्रदर्शित किया।

