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एनसीईआरटी: कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ ‘आपातकाल’, लोकतंत्र की चुनौतियों पर मिलेगा विशेष फोकस

नई दिल्ली, 25 जून: एनसीईआरटी: नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक में मौलिक अधिकारों के निलंबन, प्रेस सेंसरशिप, फेक न्यूज और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों को किया गया शामिल

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 के सोशल साइंस पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 1975-77 के आपातकाल को पहली बार नई पाठ्यपुस्तक का हिस्सा बनाया है। संशोधित पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

नई पुस्तक का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के विकास, उसकी चुनौतियों और संवैधानिक मूल्यों की गहन समझ प्रदान करना है। इसके तहत छात्रों को आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के निलंबन, प्रेस सेंसरशिप और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

लोकतंत्र की समकालीन चुनौतियों पर भी विशेष जोर

पुस्तक में केवल ऐतिहासिक घटनाओं तक सीमित रहने के बजाय वर्तमान समय की लोकतांत्रिक चुनौतियों को भी विस्तार से शामिल किया गया है। इसमें फेक न्यूज, भ्रामक सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, गरीबी, सामाजिक भेदभाव और नागरिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।

शिक्षाविदों का मानना है कि इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को लोकतंत्र के व्यावहारिक पहलुओं और समकालीन सामाजिक मुद्दों को समझने में मदद मिलेगी।

‘लोकतंत्र और आप’ सेक्शन से नागरिक जिम्मेदारियों की समझ

नई पाठ्यपुस्तक में ‘लोकतंत्र और आप’ शीर्षक से एक विशेष खंड भी जोड़ा गया है। इस सेक्शन का उद्देश्य छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की भूमिका, अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना है।

इसके माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सक्रिय भागीदारी, जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मीडिया की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर फोकस

संशोधित पुस्तक में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को ‘चौथा स्तंभ’ बताते हुए उसके महत्व को रेखांकित किया गया है। छात्रों को यह बताया जाएगा कि स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में कैसे योगदान देता है।

इसके अलावा भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए 2024 के चुनावी आंकड़ों, मतदान अवसंरचना, पंचायत प्रणाली, स्थानीय स्वशासन और महिला आरक्षण जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।

लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करने का प्रयास

एनसीईआरटी का मानना है कि नए पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक सिद्धांतों और नागरिक चेतना की बेहतर समझ विकसित होगी। यह बदलाव छात्रों को न केवल इतिहास और राजनीति की जानकारी देगा, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करेगा।

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