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देशभर में भाजपा मना रही ‘संविधान हत्या दिवस’, आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय

नई दिल्ली, 25 जून: विभिन्न राज्यों में संगोष्ठियों, प्रदर्शनी और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन; भाजपा नेताओं ने आपातकाल को लोकतांत्रिक अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला बताया

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गुरुवार को देशभर में ‘संविधान हत्या दिवस’ मना रही है। इस अवसर पर पार्टी की ओर से विभिन्न राज्यों में संगोष्ठियों, प्रदर्शनी, संवाद कार्यक्रमों और जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं और संवैधानिक मूल्यों पर पड़े प्रभाव को याद करना बताया गया है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेकर आपातकाल के ऐतिहासिक संदर्भों और लोकतंत्र की रक्षा के महत्व पर अपने विचार रखेंगे।

हरियाणा और बिहार में प्रमुख कार्यक्रम

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हरियाणा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होकर ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर संबोधित करेंगे। वहीं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बिहार की राजधानी पटना में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे।

इसके अलावा देशभर में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करने तथा युवाओं को संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

‘आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा आघात’

इस अवसर पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का “काला अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की मध्यरात्रि को देश पर आपातकाल लागू किया गया, जिसे स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सबसे बड़ा आघात माना जाता है।

उन्होंने कहा कि उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित कई संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए। उनके अनुसार यह दिन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और स्वतंत्रता के महत्व को याद करने का अवसर है।

लोकतंत्र सेनानियों को किया नमन

नितिन नवीन ने अपने संदेश में उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि अनेक लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों में भी संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के लिए आवाज उठाई।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक आपातकाल के इतिहास और उससे जुड़े संघर्षों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला, जबकि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल आज संविधान और लोकतंत्र की बात करता है, उसे आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता को बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोपा गया था।

उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बाद लिए गए राजनीतिक निर्णयों ने लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रभावित किया।

हर वर्ष 25 जून को मनाया जाएगा दिवस

केंद्र सरकार ने वर्ष 1975 में लागू किए गए आपातकाल की स्मृति में 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इस दिवस का उद्देश्य उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को याद करना है जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।

भाजपा का कहना है कि यह दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के प्रति निरंतर सजग रहने का संदेश भी देता है।

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