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सिंगापुर में 400 भारतीय-बांग्लादेशी मजदूरों पर आर्थिक संकट, वेतन बकाया और आवास छिनने से बढ़ी परेशानी

सिंगापुर, 25 जून: तीन इंजीनियरिंग कंपनियों पर श्रम नियमों के उल्लंघन के आरोप; भारतीय उच्चायोग और सिंगापुर प्रशासन ने शुरू की राहत एवं पुनर्वास प्रक्रिया

सिंगापुर में कार्यरत करीब 400 भारतीय और बांग्लादेशी प्रवासी मजदूर गंभीर आर्थिक और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। तीन निजी इंजीनियरिंग कंपनियों—एसके इंडस्ट्रीज, केपीए इंजीनियरिंग और वीवीआर प्लांट इंजीनियरिंग—पर मजदूरों का वेतन रोकने और उन्हें आवासीय सुविधाओं से वंचित करने के आरोप लगे हैं। इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब कंपनियों के संचालक रामू पलानी वेलु के कथित तौर पर देश छोड़कर चले जाने की खबर सामने आई।

वेतन बकाया और आवास संकट से बढ़ी मुश्किलें

प्रभावित मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने दैनिक खर्चों और परिवारों के भरण-पोषण की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके साथ ही आवासीय व्यवस्था समाप्त होने से कई श्रमिकों को अस्थायी आश्रय की तलाश करनी पड़ रही है।

मामले के सामने आने के बाद सिंगापुर प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, श्रमिकों के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

भारतीय उच्चायोग ने शुरू की राहत पहल

संकटग्रस्त मजदूरों की सहायता के लिए सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग सक्रिय हो गया है। भारतीय उच्चायोग ने नेशनल ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस (NTUC) और सिंगापुर के मिनिस्ट्री ऑफ मैनपावर (MOM) के साथ समन्वय स्थापित कर राहत कार्य शुरू किया है।

प्रभावित श्रमिकों को तत्काल सहायता के रूप में नकद राशि और शॉपिंग वाउचर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा उनके लिए सुरक्षित अस्थायी आवास की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की अतिरिक्त कठिनाई का सामना न करना पड़े।

नए रोजगार की तलाश में प्रशासन की मदद

अधिकारियों ने प्रभावित श्रमिकों को जल्द से जल्द वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके तहत विभिन्न कंपनियों और नियोक्ताओं के साथ समन्वय कर मजदूरों को नए रोजगार अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कंपनियों की गतिविधियों की जांच तेज

सिंगापुर के मैनपावर मंत्रालय ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ श्रम नियमों और रोजगार संबंधी प्रावधानों के संभावित उल्लंघन की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इन कंपनियों ने हाल के वर्षों में कई नई इकाइयों का पंजीकरण कराया था, जिनके पास विशेष कार्य परमिट भी थे।

भारतीय और सिंगापुर के अधिकारी संयुक्त रूप से मामले की निगरानी कर रहे हैं। दोनों देशों की एजेंसियां दोषियों की पहचान, कानूनी कार्रवाई और प्रभावित मजदूरों को उनका बकाया वेतन दिलाने के प्रयासों में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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