देहरादून, 28 जून। उत्तराखंड में जून की भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। राज्य में बिजली की खपत बढ़कर करीब 6.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है, जिससे पावर ग्रिड पर भारी दबाव देखा जा रहा है। कई इलाकों में ओवरलोडिंग के कारण ट्रिपिंग और अस्थायी आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं।
बिजली मांग में तेज उछाल
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत में राज्य में बिजली की मांग लगभग 4.6 करोड़ यूनिट थी, जो 26 जून तक बढ़कर 6.5 करोड़ यूनिट के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। केवल दो दिनों के भीतर ही मांग 5.9 करोड़ यूनिट से बढ़कर 6.5 करोड़ यूनिट के करीब पहुंच गई, जो सामान्य खपत से काफी अधिक है।
राज्य में तापमान बढ़ने और लगातार गर्मी पड़ने के कारण घरेलू और औद्योगिक उपयोग दोनों में बिजली की मांग में तेजी आई है।
आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव
बढ़ती मांग के मुकाबले बिजली आपूर्ति का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य पूल से लगभग 1.6 करोड़ यूनिट, केंद्रीय पूल से 2.1 करोड़ यूनिट और अन्य स्रोतों से करीब 1.8 करोड़ यूनिट बिजली की उपलब्धता दर्ज की गई है।
इसके बावजूद कई स्थानों पर लोड बढ़ने के कारण ग्रिड स्थिरता प्रभावित हो रही है।
ओवरलोडिंग से प्रभावित बिजलीघर
गुरुवार और शुक्रवार को विभिन्न बिजलीघरों में ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग की घटनाएं दर्ज की गईं। ऋषिकेश क्षेत्र में 132 केवी ज्वालापुर लाइन में ट्रिपिंग के कारण करीब एक घंटे तक आपूर्ति बाधित रही।
इसी तरह 132 केवी पदार्था बिजलीघर में लगभग 20 मिनट की कटौती करनी पड़ी। श्रीनगर में 160 एमवीए ट्रांसफार्मर पर ओवरलोडिंग के चलते भी कई इलाकों में अस्थायी आपूर्ति प्रभावित हुई।
ज्वालापुर-चीला और ज्वालापुर-ऋषिकेश लाइनों में ट्रिपिंग के कारण ज्वालापुर बिजलीघर में अतिरिक्त कटौती करनी पड़ी, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
यूपीसीएल का रुख
बिजली की बढ़ती मांग और आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बावजूद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने स्पष्ट किया है कि राज्य में कहीं भी घोषित बिजली कटौती नहीं की जा रही है। विभाग का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के प्रयास लगातार जारी हैं।
स्थिति पर नजर
बिजली विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गर्मी का यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में बिजली ग्रिड पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।


