लखीमपुर खीरी, 30 जून। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के दक्षिणी वन प्रभाग में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक और बाघ की मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ पहले से ही गंभीर रूप से घायल था और उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
मवेशी चराने गए ग्रामीण पर किया था हमला
वन विभाग के अनुसार, सोमवार शाम उदयपुरा गांव के निवासी 55 वर्षीय काली चरण मवेशी चराने के लिए जंगल के पास गए थे। इसी दौरान पहले से घायल अवस्था में मौजूद बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हालांकि, इस हमले में काली चरण किसी गंभीर चोट के बिना बच गए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई, जिसके चलते वन विभाग को तत्काल सूचना दी गई।
घायल बाघ की मौके पर तलाश, गंभीर अवस्था में मिला
दक्षिणी खीरी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी तापस मिहिर ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
तलाशी के दौरान बाघ हमले वाली जगह से लगभग सौ मीटर दूर अत्यंत गंभीर अवस्था में पड़ा मिला। उसकी स्थिति इतनी खराब थी कि वह चलने-फिरने में भी असमर्थ था।
विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाए गए, फिर भी नहीं बच सकी जान
डीएफओ ने बताया कि बाघ की नाजुक स्थिति को देखते हुए कानपुर चिड़ियाघर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक को तत्काल मौके पर बुलाया गया। चिकित्सकीय टीम ने उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन देर रात बाघ की मौत हो गई।
वन विभाग ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए बाघ का शव पोस्टमार्टम हेतु भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजा गया है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाएं
इस घटना के साथ ही लखीमपुर खीरी जिले में एक सप्ताह के भीतर बाघ की यह दूसरी मौत दर्ज की गई है। वहीं, वर्ष की शुरुआत से अब तक जिले में यह चौथा बाघ की मौत का मामला है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इससे पहले एक अप्रैल को दुधवा बफर जोन की मैलानी रेंज में तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से एक बाघिन की मौत हुई थी। छह मई को मझगईं रेंज में प्रजनन संघर्ष के दौरान एक बाघिन की जान गई थी। इसके बाद 23 जून को इसी क्षेत्र में एक अन्य बाघिन की ट्रैंक्विलाइज प्रक्रिया के बाद मौत हो गई थी।
वन विभाग की निगरानी तेज
लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार किया जा रहा है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल के किनारे सतर्कता बरतें और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
