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हवाई किराया घट सकता है: ATF कीमतें स्थिर रहीं तो एयरलाइंस सरचार्ज की होगी समीक्षा, यात्रियों को मिल सकती है राहत

वाराणसी, 25 जून: केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने दिए संकेत हवाई किराया घट सकता है; सरकार ईंधन कीमतों की स्थिरता पर नजर बनाए हुए है, 10,000 करोड़ रुपये का प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड भी सक्रिय

देश में हवाई यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए जल्द राहत भरी खबर आ सकती है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में आई गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो एयरलाइंस द्वारा वसूले जा रहे सरचार्ज और अन्य अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा कराई जा सकती है। इससे आने वाले समय में हवाई किरायों में कमी की संभावना बढ़ सकती है।

ईंधन कीमतों की स्थिरता पर सरकार की नजर

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार फिलहाल ईंधन कीमतों में आई कमी के टिकाऊपन का आकलन कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीने विमानन उद्योग के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं, जिसमें वैश्विक परिस्थितियों और लागत संबंधी दबावों का असर देखने को मिला।

मंत्री के अनुसार, अब जबकि ईंधन कीमतों में नरमी आई है, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यह स्थिति अस्थायी न होकर दीर्घकालिक हो। यदि कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो एयरलाइंस कंपनियों के साथ औपचारिक चर्चा कर यात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

आम यात्रियों को सस्ती हवाई यात्रा उपलब्ध कराना लक्ष्य

सरकार का मानना है कि ईंधन लागत में कमी का लाभ सीधे यात्रियों तक पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से एयरलाइंस के किराया ढांचे और विभिन्न शुल्कों की समीक्षा की जा सकती है। इससे घरेलू हवाई यात्रा को और अधिक किफायती बनाने में मदद मिलेगी।

विमानन क्षेत्र के लिए 10,000 करोड़ रुपये का फंड

विमानन उद्योग को वैश्विक तनाव, भू-राजनीतिक संकटों और ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ स्थापित किया है। यह फंड उद्योग को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हर 15 दिन में ATF कीमतों की समीक्षा

सरकार नियमित रूप से हर 15 दिन में ATF कीमतों की समीक्षा कर रही है। इसके अलावा कीमतों पर कैपिंग, एयरपोर्ट शुल्क में संभावित कटौती और आवश्यक वित्तीय सहायता जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से आने वाले महीनों में हवाई किरायों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है और विमानन क्षेत्र में स्थिरता लौटने की उम्मीद मजबूत होगी।

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