नई दिल्ली, 15 जुलाई। केंद्र सरकार ने देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान वाली ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को स्वीकृति दी गई। योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण, अनुसंधान, प्रतिभा विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर देश को चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अगले छह वर्षों में लागू होने वाली इस योजना के तहत कुल 1,27,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के माध्यम से लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित होगा।
रक्षा से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक मजबूत होगी चिप क्षमता
सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित हर क्षेत्र में सेमीकंडक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मिसाइल, ड्रोन, रक्षा उपकरण, कंप्यूटर, मोबाइल, कैमरा, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल जैसे लगभग सभी आधुनिक उत्पादों की रीढ़ सेमीकंडक्टर चिप ही है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सेमीकॉन 2.0 को केवल विनिर्माण योजना नहीं, बल्कि संपूर्ण सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की रणनीति के रूप में तैयार किया गया है।
छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी योजना
नई योजना छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगी—
- चिप डिजाइन को बढ़ावा
- मशीनों एवं आवश्यक सामग्री का उत्पादन
- नई फैब इकाइयों की स्थापना
- एटीएमपी और ओसैट उद्योग का विस्तार
- अनुसंधान एवं विकास को मजबूती
- कुशल मानव संसाधन तैयार करना
सरकार का लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन से लेकर अंतिम पैकेजिंग तक पूरी मूल्य श्रृंखला भारत में विकसित करना है।
चिप डिजाइन स्टार्टअप को मिलेगा बड़ा समर्थन
सरकार के अनुसार देश में वर्तमान समय में 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन पर कार्य कर रहे हैं। सेमीकॉन 2.0 के तहत इन्हें तकनीकी, वित्तीय और बौद्धिक संपदा विकास के क्षेत्र में सहायता दी जाएगी।
योजना का उद्देश्य भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर की डिजाइन क्षमता उपलब्ध कराना तथा स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकसित करना भी है।
मशीन, रसायन और कच्चे माल के उत्पादन पर भी जोर
सरकार पहली बार उन कंपनियों को भी प्रोत्साहन देगी जो सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनें, विशेष रसायन, गैस और अन्य आवश्यक सामग्री का उत्पादन करेंगी।
इससे भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनेगी।
2028 तक शुरू हो सकता है पहला फैब उत्पादन
सरकार के अनुसार गुजरात के धोलेरा में टाटा समूह द्वारा विकसित किए जा रहे सेमीकंडक्टर संयंत्र का निर्माण तेजी से चल रहा है। वर्ष 2028 तक वहां उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
सरकार को उम्मीद है कि पहली फैब इकाई के शुरू होने के बाद दुनिया की अन्य बड़ी कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ाएंगी।
एटीएमपी और ओसैट क्षेत्र को मिलेगा विस्तार
भारत पहले ही एटीएमपी (असेंबली, परीक्षण, मार्किंग एवं पैकेजिंग) क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब सरकार आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्ट (ओसैट) इकाइयों को भी प्रोत्साहित करेगी।
अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीक और नई उत्पादन क्षमताओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान बना सके।
अनुसंधान और कौशल विकास पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार ने बताया कि देश के 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन उपकरणों के माध्यम से छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 68 हजार से अधिक छात्र प्रशिक्षित किए जा चुके हैं।
सेमीकॉन 2.0 के तहत क्लीन रूम तकनीक, फैब संचालन, चिप डिजाइन और अनुसंधान से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग भी बढ़ाया जाएगा।
सेमीकॉन 1.0 से मिला मजबूत आधार
सरकार ने बताया कि पहले चरण यानी सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत अब तक 12 विनिर्माण इकाइयों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।
इनमें से तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि एक अन्य इकाई में वर्ष 2026 के दौरान उत्पादन प्रारंभ होने की संभावना है।
इसके अलावा 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई है तथा 105 स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को उद्योग स्तर के डिजाइन उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
निर्यात और उत्पादन में होगी बड़ी बढ़ोतरी
सरकार का अनुमान है कि नई योजना के लागू होने के बाद देश में हर वर्ष लगभग दो लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और एक लाख करोड़ रुपये तक का निर्यात संभव हो सकेगा।
इससे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, रक्षा उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल और डिजिटल अर्थव्यवस्था सहित अनेक क्षेत्रों को गति मिलेगी। साथ ही भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।


