मुंबई, 15 जुलाई। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द ओडिसी’ को लेकर भारतीय दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। हालांकि, इस फिल्म को लेकर एक महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्य सामने आया है, जो सिनेमा प्रेमियों को निराश कर सकता है। भले ही दर्शक महंगे टिकट खरीदकर फिल्म देखने पहुंचें, लेकिन भारत में उन्हें वह वास्तविक अनुभव नहीं मिल पाएगा, जिसकी कल्पना स्वयं नोलन ने इस फिल्म के लिए की है।
विशेष तकनीक से तैयार की गई है फिल्म
‘द ओडिसी’ की शूटिंग विशेष 70 एमएम आईमैक्स कैमरों से की गई है। इस प्रारूप की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल फ्रेम, असाधारण चित्र गुणवत्ता और गहराई है। लेकिन इस अनुभव का पूरा आनंद तभी लिया जा सकता है, जब फिल्म को 70 एमएम फिल्म प्रोजेक्टर और विशेष आकार की आईमैक्स स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाए।
जानकारी के अनुसार भारत के किसी भी व्यावसायिक सिनेमाघर में वर्तमान समय में ऐसा पारंपरिक 70 एमएम आईमैक्स प्रोजेक्टर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में भारतीय दर्शक फिल्म की कहानी और दृश्य प्रभाव का आनंद तो उठा सकेंगे, लेकिन नोलन की कल्पना के अनुरूप मूल सिनेमाई अनुभव उनसे दूर रहेगा।
महंगे टिकट के बावजूद अधूरा रहेगा अनुभव
महानगरों में कई दर्शक इस फिल्म के लिए तीन से चार हजार रुपये तक का टिकट खरीदने को तैयार हैं। इसके बावजूद तकनीकी सीमाओं के कारण सिनेमाघर संचालक वह गुणवत्ता उपलब्ध नहीं करा पाएंगे, जिसके लिए यह फिल्म तैयार की गई है।
भारत में मौजूद अधिकांश आईमैक्स स्क्रीन डिजिटल अथवा लेजर प्रोजेक्शन प्रणाली पर आधारित हैं। ये तकनीक सामान्य प्रदर्शन से बेहतर मानी जाती है, लेकिन पारंपरिक 70 एमएम फिल्म प्रोजेक्शन जैसी गहराई, विस्तार और दृश्य प्रभाव प्रदान करने में सक्षम नहीं है।
फिल्म रील तकनीक पर भरोसा करते हैं क्रिस्टोफर नोलन
क्रिस्टोफर नोलन लंबे समय से डिजिटल तकनीक की तुलना में फिल्म रील पर शूटिंग को प्राथमिकता देते रहे हैं। उनका मानना है कि पारंपरिक फिल्म रील चित्रों में अधिक स्वाभाविक गहराई, रंगों की समृद्धि और वास्तविकता का अनुभव देती है, जिसे डिजिटल माध्यम पूरी तरह दोहरा नहीं सकता।
इसी सोच के कारण उनकी कई चर्चित फिल्मों की शूटिंग भी बड़े प्रारूप वाली फिल्म रीलों पर की गई है। ‘द ओडिसी’ भी उसी सिनेमाई दर्शन का विस्तार मानी जा रही है।
भारतीय दर्शकों को मिलेगा सीमित तकनीकी अनुभव
देश में लगभग तीस आईमैक्स स्क्रीन मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कोई भी पारंपरिक 70 एमएम फिल्म प्रोजेक्शन प्रणाली से सुसज्जित नहीं है। ऐसे में दर्शक फिल्म की कहानी, अभिनय और निर्देशन का आनंद अवश्य ले सकेंगे, लेकिन तकनीकी दृष्टि से वह अनुभव अधूरा रहेगा, जिसे नोलन ने बड़े पर्दे के लिए तैयार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में भारत में 70 एमएम आईमैक्स प्रोजेक्शन सुविधा उपलब्ध होती है, तो दर्शकों को विश्वस्तरीय सिनेमाई अनुभव का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल ‘द ओडिसी’ भारतीय दर्शकों के लिए शानदार फिल्म तो होगी, लेकिन उसका वास्तविक दृश्य वैभव पूरी तरह महसूस करना संभव नहीं होगा।

