पौड़ी गढ़वाल, 19 जून। गढ़वाल की सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था के प्रमुख केंद्र आराध्य देव श्री कंडोलिया ठाकुर का तीन दिवसीय वार्षिक पूजन शुक्रवार से विधिवत आरंभ हो गया। धार्मिक अनुष्ठानों, देव आवाहन, ध्वजा पूजन और देव डोली के भव्य नगर भ्रमण के साथ पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में कार्यक्रमों में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की।
वार्षिक पूजन के प्रथम दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देव आवाहन और ध्वजा पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद श्री कंडोलिया ठाकुर की देव डोली का नगर भ्रमण आयोजित किया गया। डोली यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारों और भक्ति गीतों के साथ देवता का स्वागत किया। नगर भ्रमण से पूरे शहर का वातावरण धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
डोली यात्रा के उपरांत विभिन्न नौगांवों से श्रद्धालुओं द्वारा कंडोलिया मंदिर में ध्वजाएं अर्पित की गईं। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर में अखंड रामचरितमानस पाठ का शुभारंभ भी किया गया, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं ने धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का लाभ प्राप्त किया। मानस पाठ के आरंभ होने से मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक वातावरण बना रहा।
आयोजन समिति के अनुसार शनिवार को अखंड रामचरितमानस पाठ की पूर्णाहुति के बाद भजन-कीर्तन, महाआरती, रात्रि जागरण और पारंपरिक मंडाण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में क्षेत्र के कलाकार और श्रद्धालु अपनी सहभागिता निभाएंगे। रात्रि जागरण के दौरान भक्तजन पूरी रात भक्ति रस में सराबोर रहेंगे।
वार्षिकोत्सव के अंतिम दिन रविवार को विशेष यज्ञ, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के प्रसाद ग्रहण करने की संभावना है। धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के साथ तीन दिवसीय वार्षिक पूजन संपन्न होगा।
श्री कंडोलिया वार्षिकोत्सव समिति ने सभी श्रद्धालुओं से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने की अपील की है। समिति ने विशेष रूप से स्वच्छता बनाए रखने पर जोर देते हुए भंडारे के बाद उपयोग की गई पत्तलों और अन्य सामग्री को निर्धारित स्थान पर डालने का आग्रह किया है। समिति का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाना भी हम सभी का कर्तव्य है।



