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प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा: भारत-इंडोनेशिया के बीच 14 अहम समझौते, रक्षा से डिजिटल व्यापार तक सहयोग को मिली नई गति

जकार्ता 07 जुलाई। प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए 14 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों के माध्यम से रक्षा, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, अंतरिक्ष, दूरसंचार, स्वास्थ्य, कृषि, खनिज, आपदा प्रबंधन, चुनावी सहयोग और औद्योगिक विकास जैसे अनेक क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाया जाएगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने छह नई रणनीतिक पहलों की भी घोषणा की, जिनका उद्देश्य व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रभावी बनाना है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती

भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग को विस्तार देते हुए ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली पर सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और समुद्री संरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में साझा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधित संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और दूरसंचार में सहयोग का विस्तार

दोनों देशों ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उपयोग से जुड़े सहयोग समझौते का विस्तार किया। इसके अलावा चिकित्सा उत्पादों के नियमन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता विकास तथा दूरसंचार प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्रों में भी कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में साझा अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की, जिससे तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

कृषि, खनिज और औद्योगिक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों देशों ने व्यापक समझौता किया। इसके तहत आधुनिक कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा और कृषि अनुसंधान पर संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। भारत इंडोनेशिया को उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीज भी उपलब्ध कराएगा, जिससे वहां की कृषि उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा।

खनिज और इस्पात क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी समझौते हुए। भारतीय इस्पात प्राधिकरण और इंडोनेशिया की इस्पात कंपनी के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए संयुक्त उपक्रम पर सहमति बनी। वहीं, दुर्लभ खनिज आधारित प्रौद्योगिकी के विकास के लिए भी साझेदारी को अंतिम रूप दिया गया।

लोकतांत्रिक और डिजिटल सहयोग पर विशेष जोर

भारत और इंडोनेशिया के निर्वाचन आयोगों के बीच चुनावी सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य चुनाव प्रबंधन, तकनीकी अनुभव और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाना है।

डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत के खुले डिजिटल व्यापार नेटवर्क की तर्ज पर इंडोनेशिया में भी समान व्यवस्था विकसित करने की घोषणा की गई। इससे दोनों देशों के बीच डिजिटल वाणिज्य, नवाचार और व्यापारिक संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

छह नई पहलों की हुई घोषणा

यात्रा के दौरान दोनों देशों ने छह नई रणनीतिक पहलों की भी घोषणा की। इनमें योग्यकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनरुद्धार में भारत का सहयोग प्रमुख है। इसके अलावा हिंद महासागर क्षेत्र के सूचना संलयन केंद्र में इंडोनेशियाई संपर्क अधिकारी की नियुक्ति और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गेहूं के बीज उपलब्ध कराने की पहल भी शामिल है।

दोनों देशों ने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के महान शिक्षाविद् हजर देवांतरा की विरासत को समर्पित सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति वर्ष मनाने की घोषणा भी की। इसके साथ ही इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु का शाखा परिसर स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा का लाभ मिलेगा।

भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए ये समझौते दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग को भी मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

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