नई दिल्ली, 06 जुलाई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी खाड़ी देशों की आधिकारिक यात्रा के पहले पड़ाव में रविवार को कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी से दोहा में मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों में कतर एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
भारत-कतर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत के प्रमुख विषयों में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और सुरक्षा शामिल रहे।
दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने के नए अवसरों की पहचान करने पर सहमति व्यक्त की। ऊर्जा क्षेत्र में कतर लंबे समय से भारत का प्रमुख और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता रहा है, जिससे दोनों देशों के संबंधों को स्थिरता और मजबूती मिली है।
पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके संभावित प्रभावों पर केंद्रित रहा। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना वैश्विक हित में आवश्यक है।
इस संदर्भ में कतर की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में मध्यस्थता कर रहा है। वर्तमान में दोहा में विभिन्न कूटनीतिक वार्ताएं भी जारी हैं, जिनमें क्षेत्रीय शांति बहाली पर चर्चा हो रही है।
भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना
दोहा यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने प्रवासी भारतीयों के अनुभवों और सुझावों की सराहना करते हुए इसे भारत-कतर संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण आधार बताया।
विदेश मंत्री ने कतर सरकार द्वारा भारतीय समुदाय की सुरक्षा, कल्याण और सुविधाओं को सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और समर्पण से दोनों देशों के संबंधों को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
खाड़ी देशों की आगे की यात्रा और वैश्विक कूटनीतिक एजेंडा
कतर के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर बहरीन, कुवैत और ओमान के शीर्ष नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे। यह यात्रा भारत की खाड़ी क्षेत्र के साथ रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खाड़ी दौरे के समापन के बाद विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे, जहां वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी से जुड़े अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वे 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और वैश्विक मंचों पर बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत की सक्रिय भागीदारी आने वाले समय में पश्चिम एशिया और यूरोप के साथ संबंधों को और मजबूत करेगी।


