नई दिल्ली, 18 जुलाई। भारत ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रेल परियोजना में देरी को लेकर जापान के पूर्व मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि परियोजना को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के साझा लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं।
जापानी पूर्व मंत्री के बयान को भारत ने बताय व्यक्तिगत राय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी मेखारा की ओर से परियोजना में देरी को लेकर की गई टिप्पणी उनके व्यक्तिगत विचार हैं और यह वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और जापान के बीच मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को लेकर नियमित संवाद जारी है और दोनों पक्ष तकनीकी एवं संचालन से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
पहले खंड में 2027 से संचालन की तैयारी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, परियोजना के पहले चरण को वर्ष 2027 में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रवक्ता ने बताया कि जापान की ई-20 ट्रेन की आपूर्ति वर्ष 2030 की शुरुआत में होने की योजना है। यह ट्रेन वर्तमान में निर्माण प्रक्रिया में है।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान भारतीय हाई स्पीड ट्रेनों के साथ संचालन के लिए सहमत हैं और इसी दिशा में सिग्नल उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सिग्नल उपकरण को लेकर भी दी जानकारी
रणधीर जायसवाल ने कहा कि सिग्नल उपकरणों के संबंध में जापान की ओर से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर दोनों देशों के बीच समन्वय बना हुआ है।
भारत सरकार का कहना है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना देश की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसे निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उठा विवाद
गौरतलब है कि जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी मेखारा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में भारत पर परियोजना में देरी का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं को समय पर पूरा नहीं करता।
भारत ने इस टिप्पणी के बाद स्पष्ट किया कि परियोजना में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं है और दोनों देशों के बीच सहयोग के माध्यम से काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।


