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देहरादून में मानसून पूर्व तैयारियों की समीक्षा, आपदा प्रबंधन और जलभराव रोकथाम के लिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

देहरादून, 18 जून (वेब वार्ता)। उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव एवं देहरादून जिले की प्रभारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार में मानसून पूर्व तैयारियों और आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने जनपद में चल रहे कार्यों, संवेदनशील स्थलों की व्यवस्थाओं, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में किए जा रहे शमन कार्यों तथा पिछले वर्ष की आपदाओं और जलभराव से मिले अनुभवों के आधार पर की गई तैयारियों की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक के दौरान सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में सुरक्षा कार्यों, नदी सफाई तथा अन्य बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रमुख सचिव ने सभी लंबित कार्यों को मानसून शुरू होने से पहले प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही खनन गतिविधियों से जुड़े मामलों को निर्धारित समयसीमा में निपटाने को कहा गया।

मानसून में जलभराव से निपटने के लिए जनपद में उपलब्ध 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती योजना की समीक्षा भी की गई। गत वर्ष प्रभावित क्षेत्रों का पुनः आकलन कर संवेदनशील स्थानों पर अग्रिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आईएसबीटी क्षेत्र में जलनिकासी समस्या के समाधान के लिए एमडीडीए, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम गठित कर समन्वित कार्रवाई करने को कहा गया। साथ ही 12 प्रमुख नालों की सफाई और सुधार कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में अल्प अवधि की तीव्र वर्षा वाले क्षेत्रों का डेटा आधारित विश्लेषण कर संभावित जलभराव स्थलों की पहचान पर जोर दिया गया। आठ संवेदनशील नदी-नाला क्षेत्रों में चल रहे शमन कार्यों की नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। भूस्खलन प्रभावित 12 जोन और क्रॉनिक स्लिप क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने तथा किमाड़ी सहित संवेदनशील क्षेत्रों के लिए स्थायी समाधान तैयार करने को कहा गया। क्लाउडबर्स्ट संभावित क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी तंत्र को और मजबूत करने पर भी बल दिया गया।

इसके अलावा जोखिमयुक्त विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर अस्थायी और स्थायी समाधान विकसित करने तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनके लिए स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान, फॉगिंग और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि लीकेज मैपिंग में 18 स्थानों पर रिसाव चिन्हित किए गए हैं, जिन पर कार्यवाही जारी है।

जनपद में 169 नालों में से 153 की सफाई पूरी हो चुकी है, जबकि शेष पर कार्य चल रहा है। मानसून अवधि में 89 स्कूलों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है और 73 ऐसे गांव चिन्हित हैं जहां संपर्क व्यवस्था सीमित है। इन क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को पहले से नजदीकी अस्पतालों में शिफ्ट करने की व्यवस्था की गई है।

प्रमुख सचिव ने कहा कि मानसून के दौरान आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सभी विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने वार रूम और नियंत्रण कक्ष को 24×7 सक्रिय रखने तथा सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी, मुख्य नगर आयुक्त, मुख्य विकास अधिकारी, पुलिस अधीक्षक नगर, अपर जिलाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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