देहरादून, 20 जून। फाइटोकेमिस्ट्री, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य, औषधीय पौधे, एंटीऑक्सीडेंट शोध और आधुनिक चिकित्सा में आयुर्वेद के उपयोग जैसे प्रमुख विषयों के तहत शनिवार को यूकॉस्ट परिसर में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम यूनिवर्सिटीज़ जर्नल ऑफ फाइटोकेमिस्ट्री एंड आयुर्वेदिक हेल्थ की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया।
यूकॉस्ट परिसर में हुआ सेमिनार का उद्घाटन
सेमिनार का उद्घाटन Prof. Tabassum Naqvi ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में आयुर्वेद और औषधीय पौधों के बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की तथा वैज्ञानिक शोध को और अधिक प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
औषधीय पौधों और एंटीऑक्सीडेंट पर विशेष चर्चा
यूजेपीएएच के मुख्य संपादक एवं एचडब्ल्यूसी (देहरादून इकाई) अध्यक्ष Dr. S. Farooq ने जड़ी-बूटियों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुणों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों से प्राप्त तत्व जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद का समन्वय आवश्यक
यूकॉस्ट के महानिदेशक Dr. Durgesh Pant ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के समन्वय से हर्बल दवाओं की प्रभावशीलता को और अधिक बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध पुरानी और जीवनशैली आधारित बीमारियों के बेहतर प्रबंधन में नई संभावनाएं खोलते हैं।
आयुर्वेदिक शोध को वैज्ञानिक आधार देने पर जोर
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति Dr. A.K. Tripathi ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में और अधिक प्रभावी रूप से शामिल किया जा सके।
पारंपरिक चिकित्सा की प्रासंगिकता पर प्रकाश
मुख्य अतिथि प्रो. तबस्सुम नकवी ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज भी दीर्घकालिक रोगों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से कई बीमारियों का प्रभावी उपचार संभव है, बशर्ते शोध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए।
प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. आई.पी. सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर असम विश्वविद्यालय, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, उत्तरांचल विश्वविद्यालय और डॉल्फिन इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के छात्र प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
सेमिनार का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आयुर्वेद और फाइटोकेमिस्ट्री के क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध को और अधिक गति दी जाएगी।

