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बारिश की कमी से उत्तरकाशी में धान की फसल पर संकट, रोपे गए पौधे पीले पड़ने लगे

उत्तरकाशी, 20 जून। उत्तरकाशी में धान की खेती, बारिश की कमी, दिचली क्षेत्र कृषि संकट, बगोड़ी भरती सेरा और सिंचाई समस्या जैसे प्रमुख मुद्दों के बीच जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। रोपाई के बाद समय पर बारिश न होने से खेतों में नमी खत्म होने लगी है, जिससे फसल पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

खेतों में सूखने लगे धान के पौधे

दिचली क्षेत्र के कवांगढ़ी, गोरण और बगोड़ी के भरती सेरा में धान की रोपाई के बाद पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेत सूखने लगे हैं। पानी की कमी से रोपे गए धान के पौधे पीले पड़ने लगे हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है।

सैकड़ों नाली भूमि पर रोपाई, अब संकट गहराया

बगोड़ी की ग्राम प्रधान Devraj Bisht ने बताया कि भरती सेरा में सैकड़ों नाली भूमि पर धान की रोपाई की जा चुकी है, लेकिन पिछले कई दिनों से बारिश न होने के कारण खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ऊपरी खेतों में स्थिति और गंभीर

कवां क्षेत्र की ग्राम प्रधान Meena Thapliyal ने बताया कि कवांगढ़ी और गोरण क्षेत्र के ऊपरी खेतों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां सिंचाई का कोई वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं है और खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।

किसानों की बढ़ती चिंता

स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन अब फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पूरी तरह सूख सकती है और दोबारा रोपाई करनी पड़ सकती है, जिससे लागत कई गुना बढ़ जाएगी।

राहत और सर्वे की मांग

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कृषि विभाग से क्षेत्र का तत्काल सर्वे कर फसल नुकसान का आकलन करने की मांग की है। साथ ही किसानों ने अस्थायी सिंचाई व्यवस्था विकसित करने और राहत सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्र पर असर

बगोड़ी का भरती सेरा और दिचली क्षेत्र उत्तरकाशी के प्रमुख धान उत्पादक इलाकों में शामिल हैं। ऐसे में बारिश की कमी ने न केवल कृषि उत्पादन पर असर डाला है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका पर भी संकट खड़ा कर दिया है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो यह स्थिति जिले की कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

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