अहमदाबाद, 22 जून (वेब वार्ता)।
सीमेंट उद्योग में स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा, 2050 तक नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम
अडानी समूह की सीमेंट एवं निर्माण सामग्री कंपनी अंबुजा सीमेंट्स ने अपने संयंत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से ब्रिटेन स्थित स्वच्छ प्रौद्योगिकी कंपनी लीलैक लिमिटेड के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। लीलैक कार्बन कैप्चर और विद्युतीकरण समाधानों में विशेषज्ञ है और विशेष रूप से सीमेंट एवं चूना जैसे उच्च-उत्सर्जन उद्योगों के लिए उन्नत तकनीक विकसित करती है।
कंपनी ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह साझेदारी उसके व्यापक डिकार्बोनाइजेशन (कार्बन कटौती) रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वर्ष 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक होगी।
हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिफिकेशन पर फोकस
अंबुजा सीमेंट्स लगातार अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं में विद्युतीकरण को बढ़ावा दे रही है और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का विस्तार कर रही है। कंपनी के पास लगभग एक गीगावाट की कैप्टिव हरित ऊर्जा क्षमता है, जिसके माध्यम से कार्बन कैप्चर जैसी उन्नत तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी की जा रही है।
कंपनी का कहना है कि इस सहयोग से कार्बन कैप्चर तकनीक की लागत-प्रभावशीलता में सुधार होगा, जिससे इसे औद्योगिक स्तर पर अपनाना अधिक व्यवहारिक और आर्थिक रूप से संभव हो सकेगा।
सांघी संयंत्र में वाणिज्यिक पायलट प्रोजेक्ट
इस साझेदारी के तहत कच्छ के सांघीपुरम स्थित अंबुजा सीमेंट्स के 66 लाख टन वार्षिक क्षमता वाले संयंत्र में एक वाणिज्यिक प्रदर्शन परियोजना (डेमो प्रोजेक्ट) प्रस्तावित की गई है। इसमें लीलैक की कार्बन कैप्चर और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक हीटिंग तकनीक को एकीकृत किया जाएगा।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना और प्रक्रिया-जनित कार्बन डाइऑक्साइड का प्रभावी ढंग से संग्रहण करना है।
कोयले की खपत में बड़ी कमी की संभावना
नई तकनीक के सफल उपयोग से कोयले की खपत को लगभग शून्य तक लाने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग में लचीलापन भी बना रहेगा। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो इसे सात से आठ गुना तक विस्तार दिया जा सकता है।
इस विस्तार के बाद हर वर्ष 10 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर करने की क्षमता विकसित हो सकती है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्बन कैप्चर परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
नेतृत्व का बयान
अंबुजा सीमेंट्स के निदेशक करण अडानी ने कहा कि सीमेंट उद्योग को कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में ले जाने के लिए तकनीकी नवाचार, साहसिक सोच और पूरी वैल्यू चेन में सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी अगली पीढ़ी की तकनीकों को अपनाकर प्रक्रिया-आधारित उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
लीलैक का दृष्टिकोण
लीलैक लिमिटेड के सीईओ डेनियल रेनी ने कहा कि अंबुजा सीमेंट्स दुनिया के सबसे बड़े और उन्नत सीमेंट निर्माण नेटवर्क में से एक का संचालन करती है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी कम लागत और कम कार्बन उत्सर्जन वाले सीमेंट उत्पादन के लिए वैश्विक स्तर पर एक मॉडल समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
यह साझेदारी न केवल भारतीय सीमेंट उद्योग के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भारी उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल होता है तो यह भविष्य में औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन का एक नया मानक स्थापित कर सकता है।

