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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष योग शिविर आयोजित, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश

हरिद्वार, 20 जून। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में निरामया योगम् रिसर्च फाउंडेशन और इंडियन रेडक्रॉस के संयुक्त तत्वावधान में आयुष विभाग के निर्देशन में एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया। श्री अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में योग के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक संतुलन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। योग विशेषज्ञों और आध्यात्मिक गुरुओं ने प्रतिभागियों को नियमित योगाभ्यास के लाभों से अवगत कराया तथा योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

योग शिविर का शुभारंभ Swami Santoshanand Maharaj, Dr. Naresh Chaudhary तथा Dr. Urmila Pandey ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।

योग को जीवनशैली बनाने का आह्वान

निरामया योगम् रिसर्च फाउंडेशन की निदेशक एवं योगाचार्य डॉ. उर्मिला पाण्डेय ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा कि योग केवल एक दिन मनाया जाने वाला आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन की दिशा में निरंतर प्रयास का माध्यम है।

उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाता है तथा आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न तनाव को कम करने में भी सहायक होता है।

‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ थीम पर जोर

इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखण्ड के चेयरमैन प्रो. डॉ. नरेश चौधरी ने बताया कि वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर व्यक्ति की कार्यक्षमता और एकाग्रता को भी बढ़ाता है।

उन्होंने प्रतिभागियों से नियमित रूप से योग करने और अपने परिवार व समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

योग आत्मा और परमात्मा के मिलन का माध्यम

महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि योग का वास्तविक अर्थ आत्मा और परमात्मा का मिलन है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है जो मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है।

उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और इसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

योग जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. उर्मिला पाण्डेय ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने योग के प्रचार-प्रसार और समाज के अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि स्वस्थ और सकारात्मक समाज के निर्माण में योग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

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