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वाराणसी में देव स्नान पूर्णिमा पर भक्ति की छटा, जगन्नाथ मंदिर में गंगाजल से हुआ भगवान का महाअभिषेक

वाराणसी, 30 जून। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी में स्थित अस्सी के श्री जगन्नाथ मंदिर में देव स्नान पूर्णिमा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा के अनुरूप धूमधाम से संपन्न हुआ। माहेश्वरी महिला संगठन की ओर से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के साथ महेश नवमी सप्ताह का विधिवत समापन भी हुआ। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयघोष, वैदिक मंत्रों और भक्ति संगीत से गूंजता रहा।

कलश यात्रा से हुआ आयोजन का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत तुलसी घाट से निकली भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। संगठन की अध्यक्ष अलका बाहेती और मंत्री लक्ष्मी लड्ढा के नेतृत्व में महिलाओं ने चंदन और केसर मिश्रित गंगाजल से भरे कलश सिर पर धारण कर शोभायात्रा निकाली। श्रद्धालु भक्ति गीतों और जयघोष के साथ मंदिर की ओर बढ़े, जिससे पूरे मार्ग का वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कलश यात्रा का संचालन दीपक माहेश्वरी और गौरव राठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन संगठन की कोषाध्यक्ष प्रज्ञा बजाज ने प्रस्तुत किया।

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का हुआ अभिषेक

कलश यात्रा के श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचने पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का चंदन एवं केसर मिश्रित शीतल गंगाजल से विधिवत अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस विशेष अनुष्ठान में भाग लेकर देव दर्शन किए।

भजन संध्या ने बांधा भक्तिमय समां

धार्मिक अनुष्ठान के बाद आयोजित भजन संध्या ने पूरे वातावरण को भक्ति रस से भर दिया। राखी काबरा, संगीता मुंद्रड़ा और पुष्पा धूत ने अपने भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उपस्थित श्रद्धालु देर तक भक्ति संगीत में डूबे रहे और भगवान जगन्नाथ के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।

इसके बाद संगीता सोनी और संतोष सारड़ा के सहयोग से श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन के उपरांत प्रसाद ग्रहण किया।

देव स्नान पूर्णिमा का बताया धार्मिक महत्व

माहेश्वरी समाज के प्रचार मंत्री गौरव राठी ने देव स्नान पूर्णिमा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस दिन भगवान जगन्नाथ का विशेष स्नान कराया जाता है। इसके पश्चात भगवान पंद्रह दिनों के लिए एकांतवास में विराजमान रहते हैं, जिसे सनातन परंपरा में ‘अनवसर’ कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि यह परंपरा भगवान और भक्तों के बीच स्नेह, सेवा और आध्यात्मिक संबंध का प्रतीक मानी जाती है। उन्होंने कहा कि इसी धार्मिक आयोजन के साथ महेश नवमी सप्ताह का भी विधिवत समापन हुआ।

सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम

माहेश्वरी परिषद के अध्यक्ष दीपक माहेश्वरी ने कहा कि तुलसी घाट से श्री जगन्नाथ मंदिर तक निकली कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं तथा सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम में श्रवण करवा, अनिल सारड़ा, शशि नेवर, ज्योति दुजारी, सुनीता राठी, अनीता भालोठिया, रजनी बर्मन, कृष्ण भूराडिया, सविता दुजारी, सुषमा चितलांगिया, रंजना मुंधड़ा, बृजेश माहेश्वरी, कृष्ण कुमार काबरा, गोविंद बजाज, पुरुषोत्तम जाजू सहित माहेश्वरी समाज के अनेक गणमान्य सदस्य, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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