नई दिल्ली, 07 जुलाई। फ्रांस के फुटबॉल कप्तान काइलियन म्बाप्पे और पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमरिला के बीच सोशल माध्यम पर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। पैराग्वे की सीनेटर ने म्बाप्पे को खुला पत्र लिखकर उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो वह लैंगिक आधार पर हिंसा के आरोप में कानूनी कार्रवाई करने पर विचार करेंगी।
यह विवाद विश्व कप के अंतिम सोलह चरण में फ्रांस के हाथों पैराग्वे की हार के बाद शुरू हुआ। हार के बाद सीनेटर अमरिला ने सोशल माध्यम पर भावनात्मक और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके जवाब में म्बाप्पे ने उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एक घटिया महिला हैं और अपने पद के योग्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह पैराग्वे का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, जबकि देश की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सम्मान और जुझारूपन का परिचय दिया।
सीनेटर ने स्वीकार की अपनी गलती
सोशल माध्यम पर साझा किए गए खुले पत्र में सेलेस्टे अमरिला ने स्वीकार किया कि हार के बाद उन्होंने गुस्से में अनुचित भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा कि कुछ ही समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह उसी तरह के व्यवहार को दोहरा रही हैं, जिसका वह स्वयं विरोध करती हैं। इसी कारण उन्होंने अपनी टिप्पणी तुरंत हटा दी।
उन्होंने लिखा कि वह अपनी प्रतिक्रिया पर पछतावा व्यक्त करती हैं और समझती हैं कि अपमानजनक शब्द किसी भी व्यक्ति को आहत कर सकते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर उसे सुधारने का प्रयास किया, लेकिन म्बाप्पे ने अपने बयान को वापस नहीं लिया।
म्बाप्पे से सार्वजनिक माफी की मांग
सीनेटर अमरिला ने अपने पत्र में कहा कि म्बाप्पे की टिप्पणी केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान पर हमला है। उन्होंने कहा कि उन्हें जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से चुना है और किसी को भी उनकी योग्यता पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने म्बाप्पे से अपने बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह कानूनी विकल्प अपनाने के लिए बाध्य होंगी।
लैंगिक आधार पर हिंसा का लगाया आरोप
सीनेटर ने आरोप लगाया कि म्बाप्पे की टिप्पणी लैंगिक आधार पर हिंसा की श्रेणी में आती है। उनके अनुसार, एक महिला और निर्वाचित प्रतिनिधि होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनी गई महिला प्रतिनिधि के सम्मान पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में न्यायिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फ्रांस के राष्ट्रपति और विश्व फुटबॉल महासंघ प्रमुख ने किया समर्थन
इस विवाद के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने काइलियन म्बाप्पे के समर्थन में बयान जारी किया। उन्होंने नस्लवाद की निंदा करते हुए कहा कि सम्मान, गरिमा और भाईचारे के मूल्यों की रक्षा हर परिस्थिति में आवश्यक है।
वहीं विश्व फुटबॉल महासंघ के प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो ने भी पैराग्वे की सीनेटर की कथित नस्लभेदी टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पूरा फुटबॉल जगत नस्लवाद के खिलाफ एकजुट है और किसी भी प्रकार के भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह विवाद अब केवल सोशल माध्यम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खेल, राजनीति और अभिव्यक्ति की मर्यादा से जुड़े व्यापक विमर्श का विषय बनता जा रहा है।


