वॉशिंगटन, 16 जून (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने पर सहमति व्यक्त की है। उनके अनुसार, हाल ही में दोनों देशों के बीच तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) ने भविष्य के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना और उसे परमाणु हथियारों के विकास से दूर रखना है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने इसे क्षेत्र में स्थिरता और तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
उपराष्ट्रपति वेंस ने सराहा समझौता
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को ट्रंप प्रशासन की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस तरह की सहमति बनना अमेरिका की विदेश नीति के लिए सकारात्मक संकेत है।
वेंस के अनुसार, यदि समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन किया जाता है, तो इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी परमाणु प्रसार की आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी।
इजरायल ने दोहराई अपनी चिंता
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उनका देश ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि इजरायल ईरान की परमाणु गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं करेगा।
नेतन्याहू ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है जब परमाणु हथियारों के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिबंधों में राहत प्रदर्शन पर निर्भर
जानकारी के अनुसार, यह समझौता प्रदर्शन-आधारित मॉडल पर आधारित है। इसके तहत ईरान को आर्थिक प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब वह परमाणु कार्यक्रम के सत्यापन और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह पालन करेगा।
सूत्रों के अनुसार, इस सप्ताह के अंत में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। इस प्रक्रिया में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर की भागीदारी की भी चर्चा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दस्तावेज को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद इसे सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे दुनिया समझौते की शर्तों और इसके व्यापक प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकेगी।
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