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ईरान-अमेरिका समझौते पर इजरायल का सख्त रुख, नेतन्याहू बोले- सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

तेलअवीव/तेहरान, 16 जून (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति बनने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस प्रस्तावित समझौते पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। हालांकि इस घटनाक्रम के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनका देश इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है और अपनी सुरक्षा नीतियों में किसी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है।

ट्रंप से रिश्ते मजबूत, लेकिन मतभेद भी संभव

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों और ईरान को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण पर खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल लंबे समय से रणनीतिक साझेदार हैं तथा अधिकांश मुद्दों पर दोनों देशों की सोच समान रहती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मामलों में दोनों नेताओं की राय अलग हो सकती है।

नेतन्याहू के अनुसार ईरान के मुद्दे पर इजरायल का दृष्टिकोण उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं पर आधारित है। उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान को लेकर इजरायल की चिंताएं अभी भी समाप्त नहीं हुई हैं।

परमाणु कार्यक्रम पर सख्त चेतावनी

इजरायली प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनके देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि समझौते की प्रक्रिया चाहे जिस दिशा में जाए, इजरायल यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी परमाणु शक्ति संपन्न सैन्य राष्ट्र न बन सके।

उन्होंने कहा कि इजरायल ने अब तक अपने सुरक्षा हितों की रक्षा की है और आगे भी आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। नेतन्याहू के अनुसार यदि राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो इजरायल स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण रहेगा जारी

क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ने उन महत्वपूर्ण इलाकों पर नियंत्रण स्थापित किया है, जिनका उपयोग पहले हिजबुल्लाह जैसे समूह इजरायल के खिलाफ गतिविधियों के लिए करते थे। उन्होंने विशेष रूप से लेबनान सीमा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से सेना बफर जोन में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी।

उनका कहना था कि सीमावर्ती इलाकों में सैन्य उपस्थिति बनाए रखना भविष्य के खतरों को रोकने के लिए आवश्यक है और इजरायल अपनी रक्षा क्षमता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

पश्चिम एशिया की राजनीति पर नजर

सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल और अमेरिका के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में तत्काल सुरक्षा चुनौतियों को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है, लेकिन खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल का लक्ष्य क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित परमाणु खतरे को जड़ से समाप्त करना है।

जिनेवा में प्रस्तावित समझौते के बीच इजरायल के इस कड़े रुख को पश्चिम एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस समझौते और उस पर क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का प्रमुख विषय बनी रह सकती है।

Image source: Wikipedia

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