हरिद्वार, 15 जून
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय तथा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के योगा डे काउंटडाउन कार्यक्रम के अंतर्गत “गंगोत्री से गंगासागर” थीम पर योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का उद्देश्य
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ, संतुलित और जागरूक जीवनशैली को प्रोत्साहित करना तथा समाज में योग के व्यापक प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम के दौरान योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सशक्त बन सके।
योग को भारतीय ज्ञान की अमूल्य धरोहर बताया
वीडियो संदेश के माध्यम से देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में योग सबसे समृद्ध और महत्वपूर्ण विरासतों में से एक है, जिसे सहेजने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने योग को मन, शरीर और आत्मा के समन्वय की समग्र जीवन पद्धति बताते हुए इसके नियमित अभ्यास पर बल दिया।
योग विशेषज्ञों ने बताया सामंजस्य का माध्यम
विश्वविद्यालय के योग विशेषज्ञों ने कहा कि योग व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने योग को “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को योग के वैज्ञानिक और व्यावहारिक लाभों के बारे में भी जानकारी दी।
सामूहिक योगाभ्यास में शामिल हुए प्रतिभागी
इस अवसर पर प्रतिभागियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत सामूहिक योगाभ्यास किया। इसमें विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास शामिल रहा।
योगाभ्यास के दौरान उपस्थित लोगों ने मानसिक शांति और शारीरिक स्फूर्ति का अनुभव किया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, विश्वविद्यालय के कुलसचिव बलदाऊ देवांगन, डॉ. सुरेश वर्णवाल, डॉ. कामता साहू सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आगामी कार्यक्रमों की श्रृंखला
बताया गया कि योगा डे काउंटडाउन कार्यक्रम के अंतर्गत गंगोत्री, ऋषिकेश और हरिद्वार में सफल आयोजन के बाद अब यह कार्यक्रम प्रयागराज, वाराणसी, पटना, हुगली और गंगासागर में आयोजित किया जाएगा, जिससे योग के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सके।



