नई दिल्ली, 16 जुलाई। केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ को और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार को घोषणा की कि उड़ान योजना के तहत एयरलाइंस को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की अवधि अब तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य छोटे शहरों में हवाई सेवाओं को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना है।
उड़ान योजना को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने का फैसला
केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने उड़ान योजना पर आयोजित कार्यशाला के दौरान कहा कि सरकार ने इस योजना को अगले 10 वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय हवाई मार्गों को बढ़ावा देने और छोटे शहरों को बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ने के लिए योजना में कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता अवधि बढ़ाने का फैसला चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे उन एयरलाइंस को राहत मिलेगी जो कम यात्री संख्या वाले क्षेत्रों में उड़ानों का संचालन कर रही हैं।
वायबिलिटी गैप फंडिंग के नियमों में बदलाव
सरकार ने हवाई अड्डों को दी जाने वाली वायबिलिटी गैप फंडिंग के पात्रता नियमों में भी बदलाव किया है। पहले किसी हवाई अड्डे को ‘सेवा से वंचित’ या ‘कम सेवा प्राप्त’ तब माना जाता था, जब वहां सप्ताह में सात से कम उड़ानें संचालित होती थीं।
अब इस सीमा को बढ़ाकर सप्ताह में 14 उड़ानें कर दिया गया है। इससे अधिक संख्या में हवाई अड्डे और क्षेत्रीय हवाई मार्ग वित्तीय सहायता के दायरे में आ सकेंगे।
नए बदलावों से छोटे शहरों के हवाई अड्डों को संचालन में मदद मिलेगी और क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो सकेगा।
छोटे शहरों के हवाई अड्डों को मिलेगी संचालन सहायता
नागर विमानन मंत्री ने कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के ऐसे हवाई अड्डे, जो कम यात्री संख्या के कारण आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं, उन्हें संचालन एवं रखरखाव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि जिन हवाई अड्डों की आय उनके संचालन खर्च को पूरा नहीं कर पा रही है, वहां सरकार वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। इससे इन हवाई अड्डों पर हवाई सेवाएं लगातार जारी रखने में मदद मिलेगी।
हर महीने तैयार हो रहा नया हवाई अड्डा या टर्मिनल
राम मोहन नायडू ने कहा कि देश में हवाई बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य देश के दूरदराज और छोटे क्षेत्रों तक हवाई संपर्क पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में हर महीने एक नया हवाई अड्डा या नया टर्मिनल तैयार किया जा रहा है। सरकार अब क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
अगले 10 वर्षों में 100 नए हवाई अड्डों का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार अगले 10 वर्षों में 100 नए हवाई अड्डे और 200 हेलीपोर्ट विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
उन्होंने बताया कि उड़ान योजना से संबंधित कार्यशाला में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पूर्ण भागीदारी रही, जो इस योजना को लेकर राज्यों की सकारात्मक सोच को दर्शाता है।
हवाई किराये में वृद्धि और गतिशील किराया व्यवस्था पर सरकार का रुख
हवाई किरायों में बढ़ोतरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार अदालत के सामने अपना नियामकीय ढांचा प्रस्तुत करेगी।
उन्होंने कहा कि गतिशील किराया निर्धारण व्यवस्था दुनिया भर में अपनाई जाती है और विमानन क्षेत्र के विकास के लिए यह आवश्यक है। भारत में भी एयरलाइंस को इसी व्यवस्था के तहत किराया तय करने की अनुमति दी गई है।
सरकार का मानना है कि उड़ान योजना में किए गए नए बदलाव क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करेंगे और छोटे शहरों के यात्रियों को बेहतर हवाई सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।


