हरिद्वार, 10 जुलाई। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक रणनीति तैयार की है। अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने, नशा मुक्ति एवं पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने और जनजागरूकता अभियान को तेज करने के लिए प्रशासन ने कई अहम निर्णय लिए हैं। इसके तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई के साथ-साथ विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्राम स्तर तक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित एनसीओआरडी (नार्को समन्वय) समिति की बैठक में जिले में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान और विभिन्न विभागों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मादक पदार्थों की तस्करी पर लगातार कार्रवाई
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 के दौरान अब तक मादक पदार्थों के विरुद्ध कई मामलों में कार्रवाई की गई है। मादक पदार्थ नियंत्रण से संबंधित कानून के तहत स्मैक, चरस, गांजा और प्रतिबंधित दवाओं सहित विभिन्न नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि जिले में नशे के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से समाप्त किया जा सके।
प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री रोकने के निर्देश
बैठक में औषधि निरीक्षक को निर्देश दिए गए कि नारकोटिक्स और मन:प्रभावी दवाओं की अवैध बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मेडिकल स्टोरों और संबंधित प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण किया जाए। संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करने के साथ सघन जांच अभियान भी चलाया जाएगा।
इसके अलावा जिले में संचालित सभी नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि वहां निर्धारित मानकों के अनुसार सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
विद्यालयों और महाविद्यालयों में चलेंगे विशेष जागरूकता कार्यक्रम
जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, भारतीय माध्यमिक शिक्षा प्रमाणपत्र बोर्ड तथा अन्य सभी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके साथ ही नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों, शहरी क्षेत्रों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और समाज की सक्रिय भागीदारी से नशा मुक्त वातावरण तैयार करना है।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने लिया हिस्सा
बैठक में पुलिस, आबकारी, औषधि विभाग, कर विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने नशे के विरुद्ध चल रहे अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्रवाई जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
जिला प्रशासन ने कहा कि हरिद्वार को नशा मुक्त बनाने के लिए कानून के सख्त पालन, जनजागरूकता और पुनर्वास की समन्वित रणनीति पर लगातार कार्य किया जाएगा।


