हरिद्वार, 09 जुलाई। कुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद ने मेला प्रशासन पर आश्रमधारी संतों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। परिषद ने कहा कि कुंभ महापर्व की तैयारियों में आश्रमों और स्वतंत्र संत परंपराओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। इसके लिए परिषद ने प्रशासन से शीघ्र संवाद स्थापित करने, प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और 19 जून को सौंपे गए ज्ञापन पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग की है।
प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज और राष्ट्रीय महामंत्री राम विशाल दास महाराज ने कहा कि परिषद ने कुंभ से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत ज्ञापन मेला अधिकारी को सौंपा था, लेकिन अब तक न तो कोई औपचारिक जवाब मिला और न ही किसी बैठक या विचार-विमर्श के लिए परिषद को आमंत्रित किया गया।
‘कुंभ की सफलता में आश्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका’
परिषद पदाधिकारियों ने कहा कि कुंभ केवल प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे बड़ा आयोजन है। इसकी सफलता में अखाड़ों के साथ-साथ आश्रमों, मठों और स्वतंत्र संत परंपराओं की भी समान भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार के हजारों आश्रम कुंभ के दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को आवास, भोजन, चिकित्सा, सत्संग और आध्यात्मिक मार्गदर्शन जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इसलिए कुंभ की व्यवस्थाओं में आश्रमों की आवश्यकताओं और सुझावों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मेला प्रशासन से निष्पक्ष संवाद की अपील
परिषद ने मेला प्रशासन से आग्रह किया कि वह सभी संत परंपराओं को साथ लेकर कुंभ की तैयारियां आगे बढ़ाए। परिषद का कहना है कि किसी एक वर्ग तक सीमित संवाद से आयोजन की व्यापकता प्रभावित हो सकती है।
संतों ने कहा कि कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन की सफलता समन्वय, पारदर्शिता और सभी परंपराओं की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने प्रशासन से संत समाज के सभी वर्गों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने की मांग की।
समन्वय से ही सफल होगा महाकुंभ
पत्रकार वार्ता के दौरान परिषद पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में संत समाज के भीतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के बीच संवाद और आपसी सहयोग से ही कुंभ-2027 को दिव्य और भव्य बनाया जा सकता है।
परिषद ने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों को किसी प्रकार के मतभेद या विवाद से ऊपर उठकर सनातन परंपरा की गरिमा के अनुरूप आयोजित किया जाना चाहिए।
आश्रमों को मिले सक्रिय भागीदारी
राष्ट्रीय महामंत्री राम विशाल दास महाराज ने कहा कि मेला प्रशासन को केवल अखाड़ा व्यवस्था तक सीमित न रहकर आश्रमों की भूमिका को भी समान महत्व देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कुंभ-2027 को सफल और सुव्यवस्थित बनाना है तो आश्रमों को योजना निर्माण, व्यवस्थाओं और निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने आश्रमधारी संतों की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद इस विषय को गंभीरता से उठा रही है।
ज्ञापन पर कार्रवाई की दोहराई मांग
परिषद ने उत्तराखंड सरकार और कुंभ मेला प्रशासन से 19 जून को सौंपे गए ज्ञापन पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने की मांग दोहराई। साथ ही परिषद ने औपचारिक संवाद शुरू करने और कुंभ-2027 की सभी तैयारियों में आश्रमों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
पत्रकार वार्ता में परिषद के कई पदाधिकारी और संत भी मौजूद रहे। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन सभी पक्षों को साथ लेकर कुंभ की तैयारियों को आगे बढ़ाएगा और संत समाज की भावनाओं का सम्मान करेगा।


