नई दिल्ली, 06 जुलाई। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर अमित शाह ने मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों, भविष्य की कार्ययोजना और सहकारिता आंदोलन के विस्तार पर विस्तार से विचार रखे।
प्रधानमंत्री के निर्णय से सहकारिता आंदोलन को मिली नई गति
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि पांच वर्ष पहले इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार में अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश के सहकारिता आंदोलन के लिए एक नए युग की शुरुआत साबित हुआ है।
उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय तक सहकारिता क्षेत्र अपेक्षित महत्व नहीं प्राप्त कर सका था। स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक इस क्षेत्र को प्राथमिकता नहीं मिली, लेकिन अलग मंत्रालय बनने के बाद सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा, नई दिशा और नई पहचान मिली है। उनका कहना था कि इस निर्णय का लाभ देश के करोड़ों किसानों, ग्रामीण परिवारों और सहकारी संस्थाओं से जुड़े लोगों को मिल रहा है।
पांच वर्षों में सहकारिता क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव
अमित शाह ने कहा कि मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने पर जनता के सामने उपलब्धियों और आगामी योजनाओं को रखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय के गठन के समय कई लोगों ने इसका विरोध किया था। कुछ लोगों का मत था कि सहकारिता राज्यों का विषय है और केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीते पांच वर्षों में मंत्रालय ने यह सिद्ध कर दिया है कि उसका उद्देश्य राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाना है। आज स्थिति यह है कि प्रारंभिक विरोध करने वाले दलों ने भी मंत्रालय के कार्यों पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
समस्याओं की पहचान कर समाधान की दिशा में बढ़े कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मंत्रालय ने सबसे पहले सहकारिता क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों की पहचान की और उनके समाधान के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य शुरू किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और सहकारी संस्थाओं की कार्यक्षमता में सुधार हो।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब भी देश में सहकारिता आंदोलन का इतिहास लिखा जाएगा, तब वर्तमान कालखंड को स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
अनेक नई योजनाओं को मिला धरातल
अमित शाह ने बताया कि कई ऐसी परियोजनाओं को गति दी गई, जो लंबे समय से प्रस्तावित थीं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता हमेशा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जनजातीय मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जलशक्ति मंत्रालय, मत्स्य मंत्रालय, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के लिए अलग व्यवस्थाएं विकसित की गईं। इसी क्रम में वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर सहकारी क्षेत्र को नई पहचान दी गई।
एक समान व्यवस्था से मजबूत हुई प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां
अमित शाह ने कहा कि आज पूरे देश की प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां एक समान उपविधियों के आधार पर कार्य कर रही हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता आई है और कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनी है।
उन्होंने बताया कि देशभर में 55 हजार से अधिक प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां जन सेवा केंद्रों के माध्यम से तीन सौ से अधिक प्रकार की सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ी है तथा गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन के क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय सहकारी संस्था आने वाले वर्षों में देश की सबसे बड़ी गैर-सरकारी बीज उत्पादक संस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, किसानों को शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना। दूसरा, अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत बीज किस्मों का विकास और उनका व्यापक वितरण। तीसरा, भारत की पारंपरिक बीज विरासत का संरक्षण और संवर्धन करना। उनका कहना था कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
ग्रामीण विकास और किसानों को मिलेगा लाभ
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय का लक्ष्य केवल संस्थागत सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, किसानों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और सहकारी संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी इसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि सहकारिता मॉडल के माध्यम से छोटे किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को भी नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को किया याद
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका ऐतिहासिक रही है।
उन्होंने कहा कि दो निशान और दो विधान के विरोध में उन्होंने व्यापक जनआंदोलन चलाया और इसके लिए सर्वोच्च बलिदान भी दिया। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को साकार किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने उनके जन्मदिवस को देशभर के कस्बों और नगरों तक मनाने का निर्णय लिया है।
भविष्य में सहकारिता को और मिलेगा विस्तार
अमित शाह ने कहा कि आने वाले वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ग्रामीण विकास, कृषि, बीज उत्पादन, डिजिटल सेवाओं और सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देगा। उनका विश्वास है कि सहकारिता मॉडल देश की आर्थिक प्रगति, किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।


