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पिथौरागढ़ की छात्रा मानसी कापड़ी ने ऐपन कला को बनाया उद्यमिता का मॉडल, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की

देहरादून, 17 जून। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की युवा छात्रा मानसी कापड़ी ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर पारंपरिक ऐपन कला को एक सफल उद्यमिता मॉडल में बदलकर राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीबीए की छात्रा मानसी ने अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कला को केवल शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे व्यवसायिक स्वरूप देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।

बचपन से ही ऐपन कला में विशेष रुचि रखने वाली मानसी ने इस पारंपरिक उत्तराखंडी लोक कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि यदि स्थानीय कला को सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो यह रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी उद्यमिता यात्रा की शुरुआत की।

मानसी की यह यात्रा वर्ष 2024 में तब और आगे बढ़ी जब उन्होंने उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना (डीयूवाई) के अंतर्गत आयोजित द्विदिवसीय बूटकैंप में भाग लिया। इस बूटकैंप ने उन्हें उद्यमिता की बारीकियों को समझने का अवसर दिया, जिसमें यह सिखाया गया कि पारंपरिक कला और स्थानीय कौशल को आधुनिक व्यापार मॉडल में कैसे बदला जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मानसी ने अपने ऐपन कला आधारित विचार को एक व्यवसायिक प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी रचनात्मकता, प्रस्तुति और नवाचार को देखते हुए उनका चयन 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के लिए किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उनके दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया, जहां उन्हें ब्रांडिंग, पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया प्रमोशन, ऑनलाइन बिक्री, व्यवसाय पंजीकरण और वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

प्रशिक्षण के बाद मानसी ने अपने स्टार्टअप को औपचारिक रूप से “होमीज़ वाइब्स” नाम से शुरू किया। इस ब्रांड के तहत वह ऐपन कला से जुड़े विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करती हैं, जिनमें पारंपरिक डिजाइन को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाता है। उनके उत्पादों को बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिलने लगा और धीरे-धीरे उनका व्यवसाय विस्तार की ओर बढ़ने लगा।

उनके इस प्रयास को तब बड़ी सफलता मिली जब फरवरी 2025 में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में उनके उद्यम को 75 हजार रुपये का सीड फंड प्रदान किया गया। इस आर्थिक सहायता ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी और उन्होंने अपने उत्पादों के विकास, विपणन और ब्रांड विस्तार पर विशेष ध्यान देना शुरू किया।

आज मानसी कापड़ी अपने उद्यम के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार रुपये मूल्य के ऐपन उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। उनका कार्य न केवल आर्थिक रूप से उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि यह भी दर्शा रहा है कि पारंपरिक लोक कलाएं भी आधुनिक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि युवाओं को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी प्रतिभा को उद्यमिता में बदल सकते हैं।

इस उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार की देवभूमि उद्यमिता योजना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनाना है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देकर पलायन की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

देवभूमि उद्यमिता योजना सितंबर 2023 में शुरू की गई थी। यह उच्च शिक्षा विभाग की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे ईडीआईआई अहमदाबाद के सहयोग से पांच वर्षों के लिए संचालित किया जा रहा है। इस योजना के तहत राज्य के 119 राजकीय महाविद्यालयों और 5 विश्वविद्यालयों में युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

योजना के अंतर्गत कृषि, हस्तशिल्प, पर्यटन, आयुष, एग्रो-प्रोसेसिंग, ड्रोन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और नवीकरणीय ऊर्जा सहित 12 प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, बाजार संपर्क और सीड फंडिंग जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

मानसी कापड़ी की यह सफलता कहानी न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही दिशा, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास के साथ युवा अपनी पहचान खुद बना सकते हैं।

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