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रायपुर में RSS विचार गोष्ठी: ‘मैं से हम’ की भावना से ही मजबूत होगा हिंदू समाज और राष्ट्र निर्माण

रायपुर, 22 जून।

स्व. सुदर्शन की जयंती पर आयोजित व्याख्यान में नागरिक कर्तव्य, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंचम सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारमैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में संगठनात्मक विचारों और नागरिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा कि हिंदू समाज की शक्ति “मैं से हम” की भावना में निहित है, और इसी परिवर्तन से राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है।

‘नागरिक कर्तव्य: स्वार्थ ही देशद्रोह’ विषय पर हुई चर्चा

पंडरी स्थित खालसा स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘नागरिक कर्तव्य: स्वार्थ ही देशद्रोह’ विषय पर संबोधन देते हुए मुकुल कानिटकर ने कहा कि समाज में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार की बढ़ती प्रवृत्ति का मुख्य कारण नागरिकों द्वारा अपने कर्तव्यों की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने दायित्वों से विमुख होता है, तो इसका प्रभाव सीधे राष्ट्र की व्यवस्था और विकास पर पड़ता है।

उन्होंने मानव शरीर का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर की प्रत्येक कोशिका सामूहिक रूप से अंगों का निर्माण कर जीवन को सुचारू रूप से चलाती है, उसी प्रकार समाज भी प्रत्येक व्यक्ति के सहयोग से ही सशक्त बनता है। यदि एक कोशिका स्वार्थी हो जाए तो शरीर कमजोर पड़ जाता है, ठीक उसी प्रकार व्यक्तिगत स्वार्थ राष्ट्र की कमजोरी का कारण बनता है।

भ्रष्टाचार और अनुशासन पर सख्त टिप्पणी

कानिटकर ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर बदलाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को सामाजिक मान्यता नहीं मिलनी चाहिए, जो अपने स्वार्थ के लिए देश या समाज को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि समाज को ऐसे तत्वों का नैतिक बहिष्कार करना चाहिए।

RSS के उद्देश्य और शताब्दी वर्ष पर विचार

कार्यक्रम के दौरान संघ की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करना है। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना डॉ. हेडगेवार ने इस उद्देश्य से की थी कि भारत की स्वतंत्रता के बाद देश को मजबूत, संगठित और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

उन्होंने संघ की यात्रा को “राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया” बताते हुए कहा कि यह केवल एक संगठनात्मक प्रयास नहीं बल्कि व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज परिवर्तन का अभियान है।

पांच प्रमुख परिवर्तन के लक्ष्य

मुख्य वक्ता ने बताया कि संघ ने समाज परिवर्तन के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें स्वदेशी की भावना, पारिवारिक संवाद और कुटुंब सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति जागरूकता शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन मूल्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है और नागरिकों को जिम्मेदार एवं जागरूक बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ प्रांत के संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा ने की। उन्होंने स्व. सुदर्शन के जीवन और विचारों को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला व्यक्तित्व बताया।

मुख्य अतिथि अनुराग पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि नागरिक कर्तव्यों की अनदेखी से समाज में अव्यवस्था, गंदगी, यातायात समस्याएं और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।

कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने किया, जबकि स्वागत भाषण कार्यक्रम संयोजिका शील शर्मा ने दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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