हरिद्वार, 16 जून (वेब वार्ता)। हड्डियों से जुड़ी बीमारियों और अस्थि रोग संबंधी समस्याओं में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए बीएचईएल के चिकित्सा विभाग द्वारा एक विशेष बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) जांच शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर फरीदाबाद स्थित एशियन अस्पताल के सहयोग से बीएचईएल के मुख्य चिकित्सालय के अस्थि रोग विभाग में आयोजित किया गया, जिसमें कर्मचारियों और उनके परिजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शिविर में बीएचईएल के सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ-साथ उनके जीवनसाथियों को भी बीएमडी जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करना था।
शिविर का उद्घाटन महाप्रबंधक (पीसीआरआई) अमित श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर कर्मचारियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से कई गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक अवस्था में पता लगाया जा सकता है, जिससे समय रहते उचित उपचार संभव हो पाता है।
प्रमुख (चिकित्सा सेवाएं) डॉ. शारदा स्वरूप ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ती उम्र के कारण हड्डियों से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती है, इसलिए समय-समय पर जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।
शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की टीम ने लगभग 400 लोगों की बीएमडी जांच की। जांच के बाद प्रतिभागियों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया। इसके अलावा उन्हें हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त आहार लेने, नियमित शारीरिक गतिविधियां करने तथा स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में बीएचईएल के महाप्रबंधकों, वरिष्ठ अधिकारियों, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और बड़ी संख्या में कर्मचारियों की उपस्थिति रही। प्रतिभागियों ने इस शिविर को उपयोगी, जागरूकता बढ़ाने वाला और स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। चिकित्सा विभाग ने भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।



