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पटेल नगर में श्री श्याम सुंदर मंदिर के वार्षिक उत्सव पर राम कथा, हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले बच्चे सम्मानित

देहरादून, 18 जून (वेब वार्ता)। श्री श्याम सुंदर मंदिर, पटेल नगर के 43वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित श्री राम कथा के छठे दिन कथा व्यास डॉ. कमल किशोर ने श्री राम वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने माता-पिता को देव तुल्य बताते हुए उनकी आज्ञा पालन और सेवा को प्रत्येक संतान का प्रथम कर्तव्य बताया।

डॉ. कमल किशोर ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में पिता राजा दशरथ की आज्ञा को सर्वोच्च मानते हुए राजतिलक की घोषणा के बावजूद 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का यह निर्णय त्याग, मर्यादा और आज्ञा पालन का सर्वोत्तम उदाहरण है, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।

कथा व्यास ने केवट प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने केवट को गले लगाकर यह संदेश दिया कि समाज में सभी समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम कथा केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और सामाजिक समानता का संदेश भी देती है।

इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा उन बच्चों को सम्मानित किया गया जो नियमित रूप से हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ और भजन-कीर्तन करते हैं। सम्मानित बच्चों में पीहू टुटेजा, मीना कोहली, अनन्या दुआ, अनिशा सहित अन्य शामिल रहे। समिति ने बच्चों को उपहार देकर उन्हें सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान समर कैंप का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को भारतीय संस्कृति, भक्ति और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया गया।

कथा में यजमान विवेक सूरी, भूषण कोहली, हरिओम हरजाई, विवेक गोयल और अमर कांत गोयल ने व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रधान अवतार मुनियाल, महामंत्री गोविंद मोहन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अलावा तजेंद्र हरजाई, भूपेंद्र चड्ढा, गौरव कोहली, हर्षिता गोगिया, मनोज सूरी, राजू गोलानी, ओम प्रकाश सूरी, गोपाल खन्ना, पंकज चांदना, संजय मेहता, चंद्र मोहन आनंद, मनीष भाटिया, कपिल गोगिया और तुषार खंडूजा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

देहरादून, 18 जून (वेब वार्ता)। श्री श्याम सुंदर मंदिर, पटेल नगर के 43वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित श्री राम कथा के छठे दिन कथा व्यास डॉ. कमल किशोर ने श्री राम वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने माता-पिता को देव तुल्य बताते हुए उनकी आज्ञा पालन और सेवा को प्रत्येक संतान का प्रथम कर्तव्य बताया।

डॉ. कमल किशोर ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में पिता राजा दशरथ की आज्ञा को सर्वोच्च मानते हुए राजतिलक की घोषणा के बावजूद 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का यह निर्णय त्याग, मर्यादा और आज्ञा पालन का सर्वोत्तम उदाहरण है, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।

कथा व्यास ने केवट प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने केवट को गले लगाकर यह संदेश दिया कि समाज में सभी समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम कथा केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और सामाजिक समानता का संदेश भी देती है।

इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा उन बच्चों को सम्मानित किया गया जो नियमित रूप से हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ और भजन-कीर्तन करते हैं। सम्मानित बच्चों में पीहू टुटेजा, मीना कोहली, अनन्या दुआ, अनिशा सहित अन्य शामिल रहे। समिति ने बच्चों को उपहार देकर उन्हें सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान समर कैंप का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को भारतीय संस्कृति, भक्ति और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया गया।

कथा में यजमान विवेक सूरी, भूषण कोहली, हरिओम हरजाई, विवेक गोयल और अमर कांत गोयल ने व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रधान अवतार मुनियाल, महामंत्री गोविंद मोहन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अलावा तजेंद्र हरजाई, भूपेंद्र चड्ढा, गौरव कोहली, हर्षिता गोगिया, मनोज सूरी, राजू गोलानी, ओम प्रकाश सूरी, गोपाल खन्ना, पंकज चांदना, संजय मेहता, चंद्र मोहन आनंद, मनीष भाटिया, कपिल गोगिया और तुषार खंडूजा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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