गोपनीय दस्तावेजों से फिर गरमाई कोविड-19 की उत्पत्ति पर बहस
वाशिंगटन, 19 जून। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड, कोविड-19, एंथनी फौसी, वुहान लैब, खुफिया दस्तावेज और लैब-लीक थ्योरी को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। गबार्ड ने हाल ही में पहले से वर्गीकृत अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है। इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी एवं संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के पूर्व निदेशक डॉ. एंथनी फौसी ने कोरोना महामारी की उत्पत्ति से जुड़े खुफिया आकलनों को प्रभावित किया और बाद में कांग्रेस के समक्ष ऐसी किसी भूमिका से इनकार किया।
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ओडीएनआई) द्वारा जारी किए गए ये दस्तावेज ट्रंप प्रशासन की उस पहल का हिस्सा माने जा रहे हैं, जिसके तहत कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति और उससे जुड़े सरकारी निर्णयों की पुनः समीक्षा की जा रही है।
ट्रंप प्रशासन की पारदर्शिता पहल का हिस्सा
ओडीएनआई के अनुसार, दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से पहले लगभग एक वर्ष तक उनकी समीक्षा की गई। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्देश के अनुरूप थी, जिसमें महामारी से संबंधित अधिकतम सूचनाओं को जनता के सामने लाने की बात कही गई थी।
समीक्षा के दौरान कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की गवाही भी दर्ज की गई। इनमें कुछ अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर आधिकारिक निष्कर्षों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
फौसी की भूमिका पर उठे सवाल
गबार्ड का दावा है कि नए दस्तावेजों से पता चलता है कि जब यह बहस तेज हो रही थी कि कोरोना वायरस प्राकृतिक रूप से फैला था या चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला से निकला था, तब फौसी ने खुफिया अधिकारियों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से संवाद किया।
उनके अनुसार, फौसी केवल वैज्ञानिक सलाह देने तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने उन विशेषज्ञों के चयन में भी भूमिका निभाई जिनसे खुफिया एजेंसियां परामर्श ले रही थीं। आरोप है कि उन्होंने ऐसे आकलनों को आकार देने में मदद की जिन्हें बाद में वैज्ञानिक सहमति के रूप में प्रस्तुत किया गया।
‘अमेरिकी जनता सच्चाई जानने की हकदार’
गबार्ड ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण अमेरिका और दुनिया भर के करोड़ों लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वर्षों तक झूठ, सेंसरशिप और तथ्यों को छिपाने के आरोप लगते रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अमेरिकी जनता पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही की हकदार है।” गबार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों ने अपने निर्णयों और सत्ता के दुरुपयोग को छिपाने के लिए खुफिया सूचनाओं को प्रभावित किया।
खुफिया समुदाय के साथ करीबी संपर्क का दावा
ओडीएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि फौसी और अमेरिकी खुफिया समुदाय के बीच लंबे समय से पेशेवर संबंध थे। दस्तावेजों के अनुसार, कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़ी चर्चाओं में फौसी को एक ऐसे विशेषज्ञ के रूप में देखा जाता था, जिसके पास कोरोनावायरस अनुसंधान और उससे जुड़े वैज्ञानिक समुदाय की गहन जानकारी थी।
रिपोर्ट में जुलाई 2021 के एक ईमेल का उल्लेख किया गया है, जिसमें अधिकारियों ने फौसी की सिफारिशों पर आगे बढ़ने की इच्छा जताई थी। ईमेल के अनुसार, उन्हें ऐसा विशेषज्ञ माना जाता था जो कोरोनावायरस अनुसंधान के इतिहास और वर्तमान स्थिति को अधिकांश लोगों से बेहतर समझता है।
बाइडेन प्रशासन की 90-दिवसीय समीक्षा का भी उल्लेख
तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर 90 दिनों की विशेष समीक्षा का आदेश दिया था। नए दस्तावेजों में दावा किया गया है कि उस समीक्षा के दौरान खुफिया अधिकारी उन वैज्ञानिकों से संपर्क करने पर विचार कर रहे थे जिनकी सिफारिश फौसी ने की थी।
आंतरिक पत्राचार में इन वैज्ञानिकों को विषय विशेषज्ञ बताया गया और उनकी राय को समीक्षा प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
कांग्रेस में दिए गए बयान पर नया विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. फौसी ने वर्ष 2024 में हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के समक्ष अपनी गवाही में वायरस की उत्पत्ति से संबंधित खुफिया एजेंसियों के साथ किसी महत्वपूर्ण बातचीत या भूमिका से इनकार किया था।
हालांकि, गबार्ड द्वारा जारी दस्तावेजों में खुफिया अधिकारियों और कोविड-19 की उत्पत्ति की जांच के बीच कई संवादों का उल्लेख किया गया है। इसी वजह से अब उनके पूर्व बयानों पर नए सवाल उठ रहे हैं।
लैब-लीक और प्राकृतिक उत्पत्ति के बीच जारी है बहस
दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होता है कि महामारी के शुरुआती दौर में अमेरिकी सरकार के भीतर अलग-अलग मत मौजूद थे। कुछ अधिकारी मानते थे कि वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैला, जबकि अन्य विशेषज्ञ वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से जुड़े संभावित प्रयोगशाला हादसे की संभावना की जांच के पक्ष में थे।
मई 2020 में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी द्वारा तैयार एक आकलन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया था कि वुहान में ऐसी परिस्थितियां मौजूद थीं, जिनमें प्रयोगशाला में अध्ययन किए जा रहे कोरोनावायरस का अनजाने में प्रसार हो सकता था। रिपोर्ट ने प्राकृतिक और प्रयोगशाला-आधारित दोनों संभावनाओं को गंभीरता से विचार योग्य माना था।
व्हिसलब्लोअर अधिकारियों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
ओडीएनआई द्वारा जारी सामग्री में कुछ व्हिसलब्लोअर अधिकारियों के आरोप भी शामिल हैं। उनका कहना है कि जिन विश्लेषकों ने लैब-लीक सिद्धांत को संभावित विकल्प के रूप में समर्थन दिया, उन्हें कई बार हतोत्साहित किया गया, उनकी राय को महत्व नहीं दिया गया या उन्हें पेशेवर दबाव का सामना करना पड़ा।
गबार्ड ने कहा कि इन शिकायतों को आगे की जांच के लिए खुफिया समुदाय के इंस्पेक्टर जनरल के पास भेजा गया है।
अभी भी नहीं है अंतिम निष्कर्ष
कोविड-19 की उत्पत्ति महामारी से जुड़े सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक बनी हुई है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस विषय पर अब तक पूरी तरह एकमत नहीं हैं। कुछ एजेंसियां प्राकृतिक संक्रमण को अधिक संभावित मानती हैं, जबकि अन्य प्रयोगशाला से जुड़ी किसी घटना की संभावना को अधिक महत्व देती हैं।
तुलसी गबार्ड द्वारा जारी नए दस्तावेजों ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक, वैज्ञानिक और खुफिया स्तर पर नई जांच और चर्चाओं की संभावना बढ़ गई है।


