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यमुना जल बंटवारे पर बड़ा फैसला: राजस्थान को मिलेगा तय हिस्सा, अगले सप्ताह पीएम मोदी की मौजूदगी में होगा समझौता

नई दिल्ली, 23 जून।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बैठक, पाइपलाइन से पानी पहुंचाने पर बनी सहमति

यमुना जल बंटवारे को लेकर वर्षों से लंबित मुद्दे के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में हरियाणा और राजस्थान के बीच जल वितरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी उपस्थित रहे।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने बताया कि दोनों राज्यों के बीच वर्ष 1994 में हुए समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित जल हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए नया समझौता तैयार किया जाएगा। इसके तहत राजस्थान को निर्धारित मात्रा में पानी उपलब्ध कराने के लिए पाइपलाइन आधारित व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिस पर दोनों राज्यों ने सहमति जता दी है।

अगले सोमवार को हो सकता है समझौते पर हस्ताक्षर

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित समझौते का मसौदा लगभग अंतिम रूप ले चुका है। उम्मीद है कि अगले सोमवार तक इस पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

पाटिल ने कहा कि यह निर्णय न केवल राजस्थान को उसका वैधानिक जल हिस्सा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद और संसाधनों के साझा प्रबंधन का भी उदाहरण बनेगा।

जल संसाधनों के न्यायसंगत प्रबंधन पर जोर: नायब सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच जल वितरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सरकारों का उद्देश्य संवाद, समन्वय और सहयोग के माध्यम से जल संसाधनों का न्यायसंगत एवं प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों से जल प्रबंधन संबंधी लंबित विषयों पर लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो और पानी देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।

लखवार, किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर भी बनी सहमति

मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि लखवार, किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों को अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि हालिया चर्चाओं में इस बात पर भी सहमति बनी है कि मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में बहकर निकल जाने वाले वर्षा जल का बेहतर उपयोग किया जाए। इसके लिए ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी, जिनसे अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर राजस्थान सहित जल संकट वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके।

शेखावाटी क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी परियोजना: भजनलाल शर्मा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यमुना जल परियोजना और उससे जुड़े समझौता ज्ञापन (एमओए) के विभिन्न बिंदुओं पर सार्थक और सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, दूरदर्शी नेतृत्व और राजस्थान के प्रति विशेष संवेदनशीलता के कारण वर्षों से लंबित यह बहुप्रतीक्षित परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही क्षेत्रीय विकास, रोजगार और समृद्धि को भी गति मिलेगी।

वर्षों पुराने जल विवादों के समाधान की दिशा में बड़ा कदम

भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित कई अंतरराज्यीय परियोजनाओं को गति मिली है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के बीच जल बंटवारे और संसाधन प्रबंधन से जुड़े पुराने विवादों को संवाद और सहमति के माध्यम से सुलझाया जा रहा है।

उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान लंबे समय से यमुना जल में अपने हिस्से की मांग कर रहा था। वर्ष 1994 में लिए गए निर्णय को अब संबंधित पक्षों के बीच व्यापक संवाद के बाद आगे बढ़ाया जा रहा है।

जल सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित समझौता केवल जल बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर भारत में जल सुरक्षा, सिंचाई क्षमता विस्तार और पेयजल उपलब्धता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं, तो राजस्थान, हरियाणा और अन्य संबंधित राज्यों के लाखों लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

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