वाशिंगटन, 20 जून। जी-7 शिखर सम्मेलन, डोनाल्ड ट्रंप, जॉर्जिया मेलोनी, फोटो विवाद, अमेरिका-इटली संबंध और कूटनीतिक बयानबाजी को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। जी-7 बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप द्वारा मेलोनी को लेकर की गई एक टिप्पणी पर इटली की प्रधानमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उसे गलत और अपमानजनक बताया है।
ट्रंप के बयान से शुरू हुआ विवाद
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि जी-7 सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने को लेकर काफी उत्साहित थीं। ट्रंप ने कहा कि मेलोनी ने स्वयं उनके साथ फोटो लेने का अनुरोध किया था और वह इसके लिए विशेष रूप से इच्छुक दिखाई दीं। उनके इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
मेलोनी ने बताया दावा गलत और अपमानजनक
ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए जॉर्जिया मेलोनी ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप का दावा पूरी तरह गलत है और यह उनके साथ-साथ इटली की गरिमा का भी अपमान करता है। मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी किसी से ऐसी कोई मांग नहीं की और न ही वह किसी के सामने झुकने में विश्वास रखती हैं।
इटली की संप्रभुता पर दिया जोर
अपने संदेश में मेलोनी ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से कभी किसी से भीख नहीं मांगतीं और इटली भी किसी के सामने झुकने वाला देश नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मित्र देशों के बीच आपसी सम्मान और गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने के लिए सम्मानजनक संवाद सबसे महत्वपूर्ण आधार होना चाहिए।

सहयोगी देशों के प्रति व्यवहार पर उठाए सवाल
मेलोनी ने अमेरिका की विदेश नीति के संदर्भ में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के साथ सम्मानजनक और संतुलित व्यवहार किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस दृढ़ता का प्रदर्शन कभी-कभी मित्र देशों के प्रति किया जाता है, वही सख्ती विरोधियों और प्रतिद्वंद्वियों के प्रति भी दिखाई जानी चाहिए।
कूटनीतिक रिश्तों पर चर्चा तेज
जी-7 सम्मेलन के बाद सामने आया यह विवाद अब दोनों नेताओं के संबंधों और व्यापक कूटनीतिक संवाद को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई बहस को जन्म दे सकती है, हालांकि दोनों देशों के औपचारिक संबंधों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



