हल्द्वानी, 22 जून।
लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक में कमिश्नर दीपक रावत का बड़ा फैसला, संगठित भूमि धोखाधड़ी पर गैंगस्टर जैसी कार्रवाई के संकेत
कुमाऊं मंडल में भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) के मामलों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। सोमवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में आयोजित लैंड फ्रॉड कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक में भूमि संबंधी धोखाधड़ी के 77 मामलों की समीक्षा की गई। विस्तृत जांच और परीक्षण के बाद 30 मामलों में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए।
बैठक की अध्यक्षता कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने की। उन्होंने अधिकारियों को भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई व्यापक समीक्षा
बैठक में कुमाऊं रेंज की आईजी निवेदिता कुकरेती, नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी, ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया, एसएसपी अजय गणपति समेत विभिन्न जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने अलग-अलग जिलों से प्राप्त भूमि धोखाधड़ी के मामलों की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिनका समिति द्वारा विस्तार से परीक्षण किया गया। समीक्षा के दौरान भूमि खरीद-बिक्री, फर्जी दस्तावेजों, अवैध कब्जों और अन्य विवादित मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया।
30 मामलों में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश
बैठक के बाद जानकारी देते हुए कमिश्नर दीपक रावत ने बताया कि समिति के समक्ष प्रस्तुत 77 मामलों में से 30 मामलों में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं और धोखाधड़ी के तत्व पाए गए हैं। इन मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि लैंड फ्रॉड से जुड़े मामलों की रिपोर्ट जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के माध्यम से समिति तक पहुंचती है, जिसके बाद तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत समीक्षा की जाती है।
संगठित अपराध के तहत भी हो सकती है कार्रवाई
कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से भूमि धोखाधड़ी के कई मामले सामने आते हैं और इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका पाई जाती है, तो आरोपितों के खिलाफ संगठित अपराध के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित न रहें, बल्कि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में भूमि घोटालों पर अंकुश लगाया जा सके।
निवेशकों और आम नागरिकों को मिलेगा संरक्षण
प्रशासन का मानना है कि भूमि धोखाधड़ी के खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई न केवल निवेशकों और जमीन खरीदने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा करेगी, बल्कि प्रदेश में पारदर्शी भूमि प्रबंधन व्यवस्था को भी मजबूत करेगी। अधिकारियों को ऐसे मामलों की नियमित निगरानी और त्वरित जांच के निर्देश दिए गए हैं।



