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कच्चे तेल में गिरावट और शेयर बाजार की तेजी से रुपये में 102 पैसे की जोरदार मजबूती

मुंबई, 16 जून (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू शेयर बाजारों में तेजी के चलते मंगलवार को भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती दर्ज की गई। रुपये ने कारोबार के दौरान 102 पैसे की छलांग लगाई और यह मजबूती पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में देखने को मिली। हालांकि यह आंकड़े अनंतिम हैं और अंतिम आंकड़ों में हल्का बदलाव संभव है।

अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपये ने मजबूती दिखाते हुए 93.56 रुपये प्रति डॉलर का स्तर छुआ। इससे पहले पिछले कारोबारी दिन रुपये में 60 पैसे की बढ़त दर्ज हुई थी और यह 94.58 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस आधार पर मंगलवार को रुपये में कुल 102 पैसे की बढ़त दर्ज की गई, जो हाल के समय में इसकी सबसे बड़ी एकदिनी मजबूती मानी जा रही है।

विश्लेषकों के अनुसार रुपये में आई यह मजबूती मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के कारण देखने को मिली है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी सीधे तौर पर मुद्रा को समर्थन देती है, क्योंकि आयात बिल घटने से डॉलर की मांग कम हो जाती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल पर लगातार दूसरे दिन दबाव बना रहा। सोमवार को ब्रेंट क्रूड में करीब पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद मंगलवार को भी लंदन ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग दो प्रतिशत और गिरकर 81.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह स्तर पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के अलावा वैश्विक स्तर पर डॉलर सूचकांक में भी हल्की कमजोरी देखी गई, जिससे भारतीय रुपये को अतिरिक्त समर्थन मिला। डॉलर सूचकांक में यह नरमी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा के कमजोर रुख को दर्शाती है।

इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजारों में आई तेजी ने भी रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। निवेशकों की सकारात्मक धारणा और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की खरीदारी से बाजार में पूंजी प्रवाह बढ़ा, जिससे रुपये पर दबाव कम हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नरम बनी रहती हैं और वैश्विक बाजारों में स्थिरता बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में रुपये में और सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और डॉलर की चाल आगे भी मुद्रा बाजार को प्रभावित करती रहेंगी।

Image source: Pixels

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