Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

अमेरिका-ईरान शांति समझौते की पुष्टि, होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य होगी आवाजाही

दोहा/वाशिंगटन/तेहरान, 15 जून (वेब वार्ता)। कई महीनों से जारी तनाव और टकराव के बाद मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। 28 फरवरी से संघर्ष और सैन्य गतिविधियों का केंद्र बने होर्मुज जलडमरूमध्य में अब जहाजों की आवाजाही सामान्य होने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक चली बातचीत के बाद दोनों देशों ने शांति समझौते की पुष्टि की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच समझौता हो चुका है और इसे लागू भी कर दिया गया है। उनके अनुसार इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।

ट्रंप ने नाकाबंदी हटाने का किया ऐलान

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ समझौता अंतिम रूप ले चुका है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करने की भी घोषणा की। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि समझौते के अंतिम मसौदे पर दोनों पक्षों की सहमति बन गई है। उनका कहना है कि इस समझौते के बाद लेबनान सहित क्षेत्र के विभिन्न मोर्चों पर जारी संघर्ष समाप्त होने की संभावना है। ईरानी सेना ने भी समझौते को अपनी रणनीतिक सफलता बताते हुए दावा किया कि विरोधी पक्षों के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

अमेरिकी राजनीति में समझौते को लेकर बहस

समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाला समझौता पहले से मौजूद था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समझौते को समाप्त करने के बाद अमेरिका को अनावश्यक तनाव और संघर्ष का सामना करना पड़ा। जेफरीज ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का असर ऊर्जा कीमतों और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ा है।

क्षेत्रीय संकट में बड़े बदलाव की उम्मीद

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि समझौते को पूरी तरह लागू किया जाता है तो यह मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संकट को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। उनका मानना है कि इससे इजराइल, हिजबुल्लाह और क्षेत्र के अन्य पक्षों के बीच तनाव कम होगा तथा लेबनान, गाजा और समुद्री मार्गों पर फैले संघर्ष को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय विभिन्न समूहों की प्रतिक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है और क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

दुनिया भर के नेताओं ने किया स्वागत

इस बीच विश्व के कई देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है। कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने उम्मीद जताई कि यह समझौता भविष्य में सकारात्मक और रचनात्मक संवाद का आधार बनेगा।

तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा कि दुनिया लंबे समय से ऐसी खबर का इंतजार कर रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी। साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से उकसावे वाली गतिविधियों से बचने की अपील की और कूटनीतिक प्रयासों में योगदान के लिए पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब की सराहना की।

स्विट्जरलैंड में होंगे औपचारिक हस्ताक्षर

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस समझौते को युद्ध समाप्त करने, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की दिशा में अहम कदम बताया। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी समझौते का स्वागत करते हुए इसके शीघ्र क्रियान्वयन की उम्मीद जताई।

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर समझौते की पुष्टि करते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हस्ताक्षर से पहले तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बैठकों का आयोजन किया जाएगा, ताकि समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

Popular Articles