होर्मुज, 15 जून
पिछले 107 दिनों से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तीव्र तनाव अब समाप्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक 14 सूत्रीय समझौते (MoU) पर सहमति जताई है, जिसके तहत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते को वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम पहले ही प्रभावी हो चुका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की तैयारी
समझौते का सबसे अहम हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पुनः पूरी तरह से खोलना है। ईरान ने सहमति दी है कि वह अगले 4 से 30 दिनों के भीतर अपने सैन्य अवरोध हटाकर इस रणनीतिक जलमार्ग को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल देगा। इस फैसले के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज के खुलने से कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता आएगी, बल्कि वैश्विक मुद्रास्फीति पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े समूहों ने भी इस कदम को सकारात्मक बताया है।
वर्तमान में कच्चा तेल 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है, जिसे बाजार के लिए एक मजबूत राहत संकेत माना जा रहा है।
14 सूत्रीय समझौते के प्रमुख प्रावधान
सूत्रों और मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार इस समझौते में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं—
- लेबनान और अन्य मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम लागू होगा।
- अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
- 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त की जाएगी।
- ईरान की सीमाओं के पास से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी होगी।
- होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खोला जाएगा।
- ईरान पर लगे तेल और पेट्रोकेमिकल प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी।
- ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की सहायता योजना प्रस्तावित की जाएगी।
इसके अलावा, समझौते के अनुसार दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर भी संयुक्त कार्य करने के लिए तैयार होंगे, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सैन्य टकराव की स्थिति को रोका जा सके। समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनने की बात सामने आई है।
परमाणु मुद्दे पर भी सहमति की दिशा
समझौते के अगले चरण में ईरान को आर्थिक राहत देने की योजना शामिल है। अमेरिका ने ईरान के जब्त किए गए लगभग 24 अरब डॉलर के फंड को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमति जताई है। इसके बदले ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि वह परमाणु हथियारों का विकास नहीं करेगा और अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करेगा।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी को भी और मजबूत करने पर सहमति बनने की संभावना जताई जा रही है। अगले 60 दिनों में परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल नीति और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े मुद्दों पर अंतिम व्यापक समझौता किए जाने की बात भी कही गई है।
कूटनीतिक श्रेय को लेकर खींचतान
इस शांति समझौते को लेकर कूटनीतिक श्रेय लेने की भी होड़ देखने को मिली है। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाने का दावा किया, हालांकि उसे पूर्ण श्रेय नहीं मिल सका। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फिर भी 14 सूत्रीय समझौते की पुष्टि की है।
कई क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते में मध्यस्थ देशों की भूमिका भविष्य की कूटनीति के लिए एक नया मॉडल प्रस्तुत कर सकती है।
मध्य पूर्व में स्थिरता की उम्मीद
समझौते के मसौदे में लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया है, जिसे अमेरिका ने अलग मुद्दा बताया है। इसके बावजूद इस समझौते को मध्य पूर्व में तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इसे पिछले कई दशकों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जाएगा।



