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थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का जम्मू-कश्मीर दौरा, एलओसी से अमरनाथ यात्रा तक सुरक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा

नई दिल्ली, 10 जुलाई। भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पदभार संभालने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर स्थित उत्तरी कमान का दौरा कर नियंत्रण रेखा (एलओसी), कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र की सुरक्षा तैयारियों का व्यापक आकलन किया। तीन दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने अग्रिम सैन्य चौकियों का निरीक्षण किया, आतंकवाद-रोधी अभियानों की समीक्षा की, अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और सैनिकों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।

सात से नौ जुलाई तक चले इस दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने श्रीनगर, कुपवाड़ा, उरी, मानसबल, पुंछ, राजौरी और सुंदरबनी सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, सैन्य तैयारियों, निगरानी तंत्र और आधुनिक तकनीक के उपयोग की भी समीक्षा की।

उत्तरी कमान की परिचालन तैयारियों का लिया विस्तृत जायजा

दौरे की शुरुआत श्रीनगर स्थित चिनार कोर मुख्यालय से हुई, जहां सेना प्रमुख को उत्तरी कमान के समग्र सुरक्षा परिदृश्य और परिचालन तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने नियंत्रण रेखा की मौजूदा स्थिति, आतंकवाद-रोधी अभियानों, सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती और सुरक्षा रणनीति पर प्रस्तुतीकरण दिया।

जनरल सेठ ने अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सतर्कता बनाए रखने और परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया।

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा

श्रीनगर प्रवास के दौरान सेना प्रमुख ने जारी श्री अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और हर परिस्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियां पूरी तरह तैयार रहें।

एलओसी पर अग्रिम चौकियों का किया निरीक्षण

जनरल धीरज सेठ ने कुपवाड़ा, उरी और मानसबल जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर अग्रिम सैन्य तैनाती का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, आतंकवाद-रोधी तंत्र और परिचालन तैयारियों की जानकारी दी गई।

उन्होंने अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों से मुलाकात कर कठिन परिस्थितियों में उनके साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। सेना प्रमुख ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा में तैनात सैनिकों का समर्पण देश की सबसे बड़ी ताकत है।

जम्मू क्षेत्र में आतंकवाद-रोधी ग्रिड का किया आकलन

दौरे के अगले चरण में सेना प्रमुख ने व्हाइट नाइट कोर मुख्यालय का दौरा किया और जम्मू क्षेत्र के पुंछ, राजौरी तथा सुंदरबनी सेक्टरों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

उन्होंने नियंत्रण रेखा पर तैनात सैन्य इकाइयों की परिचालन क्षमता, आतंकवाद-रोधी ग्रिड, निगरानी तंत्र, सैन्य अवसंरचना और सीमा क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने उन्हें मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति से भी अवगत कराया।

जनरल सेठ ने सभी सैन्य संसाधनों के प्रभावी उपयोग और उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों को बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

स्वदेशी तकनीक और सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर

दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर में आयोजित स्वदेशी तकनीकों पर आधारित सैन्य नवाचार प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न सैन्य इकाइयों द्वारा विकसित तकनीकी समाधानों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आधुनिक और स्वदेशी तकनीकों को तेजी से अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण, तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान और युद्धक क्षमता बढ़ाने वाली नई प्रणालियों के समावेशन पर विशेष जोर दिया।

उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से की मुलाकात

जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। इस दौरान सुरक्षा, शांति व्यवस्था, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक में क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

सीमावर्ती गांवों में जनकल्याण कार्यों की सराहना

सेना प्रमुख ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे जनकल्याण कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामुदायिक सहयोग से जुड़े प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सेना केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक विकास और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने प्रथम सीमा गांवों में स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया।

‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना के साथ तैयार रहने का संदेश

दौरे के समापन पर जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के सभी अधिकारियों, जवानों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों की परिचालन दक्षता, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की।

उन्होंने सैनिकों से हर चुनौती के लिए तैयार रहने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना को भविष्य की सभी सुरक्षा चुनौतियों के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार रहना होगा।

जनरल धीरज सेठ ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तरी कमान और उससे जुड़ी सभी सैन्य इकाइयां देश की सीमाओं की सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।

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